नई दिल्ली, 12 सितंबर 2025। भारत सदियों से ज्ञान, संस्कृति और परंपरा का केंद्र रहा है। इसी धरोहर को वैश्विक मंच पर साझा करने की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है ‘ज्ञान भारतम्’, जिसे आने वाली पीढ़ियों और विश्व समुदाय के लिए भारत का अनमोल उपहार बताया जा रहा है। नई दिल्ली में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में इस पहल पर विस्तार से चर्चा की गई और इसे भारत की बौद्धिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा को संजोने वाला अभूतपूर्व प्रयास माना गया। सम्मेलन में देश-विदेश से आए विद्वानों, शिक्षाविदों और नीति-निर्माताओं ने भाग लिया और भारत की ज्ञान परंपरा को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने की रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया।
‘ज्ञान भारतम्’ का उद्देश्य केवल भारतीय ज्ञान परंपरा को पुनर्जीवित करना नहीं है, बल्कि इसे आधुनिक समय की चुनौतियों के अनुरूप ढालकर वैश्विक समाज तक पहुँचाना है। इसमें वेद, उपनिषद, आयुर्वेद, योग, खगोलशास्त्र, गणित, साहित्य और दर्शन जैसी धरोहरों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करने की योजना है। सम्मेलन में वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि यह पहल भारत को केवल सांस्कृतिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि शिक्षा और शोध के वैश्विक केंद्र के रूप में भी स्थापित करेगी। इससे आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जुड़े रहने के साथ-साथ एक व्यापक और संतुलित विश्वदृष्टि भी मिलेगी।
अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में विभिन्न सत्रों का आयोजन किया गया, जिसमें भारत की प्राचीन पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण, पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक शोध से जोड़ने और शिक्षा प्रणालियों में भारतीय विचारधारा को स्थान देने जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। विद्वानों ने कहा कि ‘ज्ञान भारतम्’ वास्तव में “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना का विस्तार है, जिसमें पूरे विश्व को एक परिवार मानकर साझा ज्ञान और अनुभवों से सबको लाभ पहुंचाना ही मुख्य उद्देश्य है। कई विदेशी प्रतिनिधियों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि भारत का यह प्रयास वैश्विक स्तर पर टिकाऊ विकास, स्वास्थ्य और शिक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
सम्मेलन के समापन अवसर पर यह स्पष्ट किया गया कि ‘ज्ञान भारतम्’ केवल भारत की सांस्कृतिक और बौद्धिक धरोहर का पुनर्प्रतिष्ठान नहीं है, बल्कि यह विश्व को भारत का अनमोल उपहार है। इससे भारत अपनी उस पहचान को और सशक्त करेगा जो ज्ञान, शांति और मानवीय मूल्यों की धरती रही है। नई दिल्ली में आयोजित यह अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन इस बात का प्रतीक है कि आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक विचार-नेतृत्व की भूमिका में और अधिक मजबूती से उभरेगा। प्रतिभागियों ने विश्वास जताया कि यह पहल भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी और भारत को ज्ञान व संस्कृति का वैश्विक मार्गदर्शक स्थापित करेगी।












