नई दिल्ली, 12 सितंबर 2025। भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। अब से प्रत्येक वर्ष 23 सितंबर को ‘आयुर्वेद दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा। वर्ष 2025 का मुख्य आयोजन गोवा स्थित अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान में किया जाएगा। यह निर्णय न केवल आयुर्वेद की शाश्वत परंपरा को स्थायी रूप से स्थापित करेगा, बल्कि इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक लोकप्रिय बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। विश्वभर में तेजी से बदलती जीवनशैली और बढ़ती बीमारियों के बीच आयुर्वेद को “One Earth, One Health” के मंत्र से जोड़कर स्वास्थ्य के समग्र दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में नई ऊर्जा प्रदान की जाएगी।
आयुर्वेद दिवस के आयोजन का उद्देश्य केवल भारतीय चिकित्सा पद्धति को सम्मान देना ही नहीं, बल्कि इसे आधुनिक समय की स्वास्थ्य चुनौतियों के समाधान के रूप में प्रस्तुत करना भी है। लंबे समय से आयुर्वेद को केवल पारंपरिक औषधीय पद्धति के रूप में देखा जाता रहा है, लेकिन अब वैज्ञानिक अनुसंधान और वैश्विक मंचों पर बढ़ते संवाद ने इसे एक सशक्त विकल्प बना दिया है। गोवा में होने वाला यह भव्य आयोजन विभिन्न देशों के आयुर्वेद विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और चिकित्सा विद्वानों को एक मंच पर लाएगा। इससे न केवल ज्ञान-विनिमय को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि आयुर्वेद को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़ने का मार्ग भी प्रशस्त होगा।
केंद्रीय आयुष मंत्रालय ने इस अवसर पर कहा है कि आयुर्वेद केवल चिकित्सा नहीं, बल्कि एक जीवन शैली है, जो शरीर, मन और आत्मा के संतुलन पर आधारित है। “One Earth, One Health” का मंत्र इस बात का प्रतीक है कि धरती पर सभी प्राणियों का स्वास्थ्य एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है। आयुर्वेद इस समग्र सोच को अपनाकर प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और स्वास्थ्य के स्थायी विकास को बढ़ावा देता है। इस आयोजन के माध्यम से आयुर्वेद की औषधीय पद्धतियों, पंचकर्म चिकित्सा, योग और आहार-विहार पद्धति पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इससे आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं को एक नया आयाम मिलने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आयुर्वेद दिवस का वार्षिक आयोजन भारत की सांस्कृतिक और वैज्ञानिक धरोहर को सशक्त आधार प्रदान करेगा। यह कदम भारत को वैश्विक स्वास्थ्य नेतृत्व की ओर अग्रसर करने में सहायक होगा। गोवा में आयोजित होने वाला यह समारोह न केवल चिकित्सा जगत के लिए, बल्कि आम जनता के लिए भी आयुर्वेद को अपनाने और समझने का अवसर बनेगा। यह ऐतिहासिक निर्णय आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक नई राह खोलेगा और भारत की इस प्राचीन चिकित्सा प्रणाली को विश्व मंच पर स्थायी पहचान दिलाएगा।












