रांची, 12 सितंबर 2025। भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तत्वावधान में आज रांची के होटल रेडिशन ब्लू में नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (के॰का॰) की छमाही बैठक का सफल आयोजन किया गया। यह इस वर्ष की दूसरी और समिति की कुल 29वीं बैठक थी, जिसकी अध्यक्षता माननीय मुख्य आयकर आयुक्त, रांची, श्री राजेश कुमार झा, भा.रा.से. ने की। इस महत्वपूर्ण बैठक में 108 सदस्य कार्यालयों में से लगभग 120 सदस्य उपस्थित हुए, जिनमें लगभग 70 कार्यालयों के विभागाध्यक्ष एवं प्रमुख भी शामिल रहे। बैठक का संचालन समिति के सचिव, डॉ. सूर्यकांत सामल ने किया, जिन्होंने सभी प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए नराकास बैठक के महत्व और इसकी उपयोगिता पर प्रकाश डाला।
बैठक में क्षेत्रीय कार्यान्वयन कार्यालय, कोलकाता से आए उप निदेशक (कार्यान्वयन) डॉ. विचित्र सेन गुप्ता ने विस्तार से नराकास की भूमिका और इसकी कार्यप्रणाली पर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय प्रशासनिक तंत्र को आमजन से जोड़ने का सेतु है। इस अवसर पर सदस्य कार्यालयों की तिमाही रिपोर्टों की समीक्षा की गई और यह सुनिश्चित करने पर बल दिया गया कि सरकारी कामकाज में हिंदी के अधिकतम उपयोग के साथ-साथ उसकी गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान दिया जाए। बैठक का माहौल सकारात्मक और रचनात्मक विचार-विमर्श से भरा हुआ रहा, जहां सभी विभागों ने हिंदी को अपनाने के अपने अनुभव साझा किए।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में श्री राजेश कुमार झा ने कहा कि वर्तमान समय में हिंदी में कार्य करना कोई कठिनाई नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान के अनुरूप केंद्र सरकार के सभी कार्यालयों में सरकारी कार्यों में हिंदी का प्रयोग अनिवार्य है। श्री झा ने सभी सदस्यों से आग्रह किया कि वे राजभाषा नीतियों, नियमों और आदेशों को और अधिक प्रभावी ढंग से लागू करें। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि राजभाषा विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध ‘हिंदी शब्द सिंधु’, ‘ई-पत्रिका पुस्तकालय’ और अन्य डिजिटल साधनों का अधिकाधिक उपयोग किया जाए, जिससे तकनीकी कार्यों में भी हिंदी का सरल और सटीक प्रयोग संभव हो सके।
बैठक के दौरान नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (के॰का॰), रांची द्वारा प्रकाशित ‘राजभाषा जोहार’ पत्रिका के पंचम अंक का विमोचन भी किया गया। इस अवसर पर पत्रिका को हिंदी की बढ़ती भूमिका का प्रतिबिंब बताया गया और इसे सरकारी कार्यालयों में भाषा जागरूकता बढ़ाने का सशक्त माध्यम माना गया। अंत में, कृषि प्रणाली के पहाड़ी एवं पठारी अनुसंधान केंद्र की तकनीकी अधिकारी (राजभाषा) श्रीमती अणिमा प्रभा ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि हिंदी को सरकारी कामकाज की भाषा बनाने में सभी का सामूहिक प्रयास आवश्यक है। इस छमाही बैठक ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि हिंदी केवल राजभाषा नहीं बल्कि राष्ट्र की एकता और संवाद की आत्मा है।












