रांची पुलिस और एटीएस ने आखिरकार वह कारनामा कर दिखाया, जो आम लोग बॉलीवुड फिल्मों में ही देखते हैं—एक लॉज से संदिग्ध आतंकी की गिरफ्तारी। जी हां, इस बार लॉज वालों को मुफ्त में हेडलाइन पब्लिसिटी मिल गई है, क्योंकि उनका साधारण कमरा अब “अंतरराष्ट्रीय ब्रेकिंग न्यूज़” का हिस्सा बन गया। आरोपी अशहर दानिश, जो कभी बोकारो की गलियों में घूमता था, अब पुलिस की नजरों में ‘वैश्विक खतरा’ बन गया है। यकीन मानिए, अगर यह सीरीज़ नेटफ्लिक्स पर बनती तो पहला एपिसोड “लॉजवाले का सरप्राइज” होता।
सबसे मज़ेदार पहलू यह है कि आतंकी साहब दिल्ली में वांछित थे, लेकिन उन्हें लगा कि रांची का लॉज सबसे सुरक्षित जगह है। शायद उन्हें रांची के ट्रैफिक जाम और बिजली कटौती पर भरोसा था कि यहां पुलिस भी उन तक पहुंचने से पहले थक जाएगी। लेकिन दुर्भाग्य देखिए, झारखंड एटीएस, दिल्ली पुलिस और रांची पुलिस की “थ्री इन वन टीम” ने मिलकर गेम खराब कर दिया। अब बेचारे दानिश साहब अपने कमरे से ज्यादा समय थाने की पूछताछ रूम में बिताने वाले हैं।
पूरे मामले ने एक सवाल खड़ा कर दिया है—क्या अब देश में आतंकी भी ‘लॉज डिस्काउंट’ और ‘बजट रूम’ का फायदा उठा रहे हैं? सोचिए, जब सामान्य छात्र लॉज में पढ़ाई करने जाते हैं तो पुलिस उनके पेन और कॉपी तक चेक नहीं करती, लेकिन आतंकियों को लगता है कि यही सबसे ‘सेफ स्पॉट’ है। खैर, पुलिस की कामयाबी ने यह साबित कर दिया है कि “गेस्ट हाउस में गेस्ट कोई भी हो, रजिस्टर में नाम लिखना ज़रूरी है।” वरना अगली बार ‘गुड मॉर्निंग’ कहने से पहले दरवाज़ा खटखटाने वाली पुलिस हो सकती है।












