पहले सोशल मीडिया सिर्फ़ रिश्ते-नाते निभाने और पुराने दोस्तों की फोटो पर “Nice pic” लिखने का ज़रिया था। मगर अब तो हालत यह है कि इन प्लेटफॉर्म्स ने खुद को ATM मशीन में तब्दील कर लिया है—वो भी ऐसी मशीन, जहां कैश डालने की ज़रूरत ही नहीं, बस यूजर स्क्रॉल करते जाएं और कंपनियों की तिजोरी भरती जाए। फेसबुक उर्फ़ Meta तो इसमें “बिग बॉस” बन बैठा है। 3 अरब से ऊपर के यूजर्स, और 97% कमाई विज्ञापन से—यानी जो भी दिखेगा, वो बिकेगा। इतना पैसा आया कि अब शायद मार्क जुकरबर्ग चाय पीते समय कप में शक्कर डालने की बजाय डॉलर डालते होंगे।
इंस्टाग्राम की बात करें तो यहां खेल थोड़ा और रंगीन है। यहां विज्ञापन का तड़का, रील्स का मसाला और इंफ्लुएंसर मार्केटिंग का स्वाद है। मेटा को जो 117 बिलियन डॉलर फेसबुक से मिला, उसमें इंस्टा का 50 बिलियन डॉलर का योगदान है। और यह सब इसलिए क्योंकि हर दूसरा शख्स “Collab karlo na yaar” वाले डायलॉग पर जी रहा है। फैशन से लेकर ब्यूटी और ट्रैवल से लेकर टेक तक, सबकुछ इंस्टा पर बिक रहा है। ऐसे में ब्रांड्स तो बस पैसों की बोरी खोलकर बैठे रहते हैं, और इंस्टा आराम से कैश गिनता है। साफ है—यहां यूजर मज़े ले रहे हैं, लेकिन कमाई का मज़ा सिर्फ कंपनी ले रही है।
अब आते हैं बेचारे ट्विटर उर्फ़ X पर। एलन मस्क ने इसे खरीद तो लिया, लेकिन शायद उन्हें उम्मीद थी कि ट्विटर खरीदने के बाद पैसे पेड़ पर उगेंगे। हकीकत यह है कि कंपनी की विज्ञापन आय आधी रह गई और कमाई सिर्फ़ 3 बिलियन डॉलर तक सिमट गई। हां, सब्सक्रिप्शन मॉडल लाकर उन्होंने कोशिश की है कि लोग अपनी प्रोफाइल पिक के साथ-साथ वॉलेट भी अपडेट करें, मगर नतीजे खास नहीं दिख रहे। जाहिर है, ट्विटर इस मुकाबले में वही खिलाड़ी है जो मैदान में उतरा तो ज़रूर है, पर गेंद आते ही आउट हो गया।












