गिरिडीह में खंडोली डैम को लेकर उठे विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। आरोप लगाया गया था कि मशरूम और अंडा फार्म से निकलने वाला गंदा पानी सीधे डैम में छोड़ा जा रहा है, लेकिन जांच में मामला अवैध वसूली और राजनीतिक दबाव का निकला। फार्म संचालक का कहना है कि डैम फार्म से करीब 3 किलोमीटर दूर है और गंदा पानी छोड़ने का सवाल ही नहीं उठता।

उन्होंने खुलासा किया कि स्थानीय मुखिया लंबे समय से उनसे 50 हजार रुपये मासिक रंगदारी मांग रहे थे और इनकार करने पर झूठे आरोप लगाने लगे। संचालक ने यह भी बताया कि चार साल से चल रहे इस फार्म में सैकड़ों ग्रामीण, खासकर महिलाएँ, मशरूम उत्पादन से आत्मनिर्भर बनी हैं। वहीं, प्रशासनिक जांचों में भी डैम को प्रदूषित करने का कोई सबूत नहीं मिला। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर इतनी बड़ी साजिश के पीछे असली मकसद क्या है—डैम की सफाई या वसूली की राजनीति













