डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर कुल 50% टैरिफ लगाने का ऐलान किया है, जिसमें 25% रूस से तेल खरीदने पर “जुर्माना” के तौर पर जोड़ा गया है। इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्रंप के “दोस्ती” वाले बयान पर प्रतिक्रिया दी और कहा कि उनकी भावनाओं की सराहना की जानी चाहिए। मोदी ने कहा कि रिश्तों में आपसी सम्मान और समझ सबसे अहम है। हालांकि, आम लोगों का कहना है कि यह दोस्ती अगर सच है तो जनता पर बढ़ते आर्थिक बोझ का समाधान भी निकलना चाहिए। दिल्ली के एक व्यापारी ने कहा, “बयानबाजी से हमें फायदा नहीं, महंगाई कम होनी चाहिए।”
सड़क पर पूछे गए आम नागरिकों का कहना है कि ट्रंप और मोदी के बीच दोस्ती की बातें सुनकर उन्हें खुशी तो होती है, लेकिन बढ़ती महंगाई ने उनके बजट को हिला दिया है। एक गृहिणी ने कहा, “तेल और गैस के दाम बढ़ते जा रहे हैं, तो हमें दोस्ती से क्या मिलेगा?” वहीं, एक छात्र ने तंज कसते हुए कहा कि यदि वैश्विक राजनीति का असर आम लोगों की थाली तक पहुंचेगा, तो नेता चाहे जितनी भी बड़ी बातें करें, जनता के लिए वही मायने रखेगा। यह स्थिति भारत के आम नागरिकों को सोचने पर मजबूर कर रही है कि क्या दोस्ती के नाम पर देश को आर्थिक दबाव में डाला जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने जिस तरह ट्रंप की भावनाओं की सराहना की, वह राजनयिक दृष्टिकोण से मजबूत कदम है। लेकिन जनता का संदेश साफ है—दोस्ती सिर्फ मंच पर कहे गए शब्दों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि आम नागरिकों की जिंदगी में राहत के रूप में दिखनी चाहिए। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि भारत को अब अपनी रणनीति और अधिक मजबूती से तय करनी होगी, ताकि दोस्ती और राष्ट्रीय हित के बीच संतुलन कायम रहे। लोगों का कहना है कि असली दोस्ती वही है, जो जनता को महंगाई से राहत दिलाए और विकास का रास्ता खोले।












