झारखंड में मौसम का मिजाज लगातार लोगों को परेशान कर रहा है। राजधानी रांची समेत अधिकांश जिलों में बीते 24 घंटे लगभग सूखे रहे, सिर्फ खूंटी में हल्की बारिश दर्ज की गई। लोग चिलचिलाती धूप और उमस से बेहाल हैं। मौसम विभाग का कहना है कि बंगाल की खाड़ी में बना साइक्लोनिक सर्कुलेशन कमजोर पड़ चुका है, वहीं मॉनसून ट्रफ इस समय बिहार से गुजर रही है, जिसका सीधा असर झारखंड पर नहीं पड़ रहा है। हालांकि, आज शाम रांची, खूंटी और पूर्वी सिंहभूम में हल्की बूंदाबांदी की संभावना जताई गई है। लेकिन वज्रपात की चेतावनी के चलते लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
गांव के किसानों का कहना है कि समय पर बारिश न होने से उनकी खेती प्रभावित हो रही है। रांची के किसान शिवनाथ महतो ने बताया, “धान की बुआई के लिए पानी की कमी बहुत बड़ी चिंता है, अगर जल्द बारिश नहीं हुई तो हमारी मेहनत पर असर पड़ेगा।” वहीं शहरवासियों का कहना है कि गर्मी और उमस की वजह से बच्चों और बुजुर्गों को स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें हो रही हैं। धनबाद की एक गृहिणी सीमा देवी ने बताया, “बार-बार बिजली कटना और उमस भरी गर्मी घर में रहना मुश्किल बना देती है।” साफ है कि बारिश का इंतजार अब राहत की उम्मीद से ज्यादा चिंता में बदल रहा है।
मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि हल्की बारिश के साथ वज्रपात की संभावना बनी हुई है। ऐसे में लोगों को अनावश्यक बाहर निकलने से बचने की सलाह दी गई है। खुले मैदान या ऊंचे स्थानों पर खड़े न हों और सुरक्षित जगहों पर ही शरण लें। इस बदलते मौसम से हमें एक संदेश मिलता है कि प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर चलना जरूरी है। मौसम की अनिश्चितता हमें यह भी सिखाती है कि सुरक्षा उपायों का पालन ही असली समझदारी है। किसानों और आम जनता के लिए यही संदेश है कि उम्मीद बनाए रखें, क्योंकि मौसम का पहिया देर-सबेर बदलता ही है।












