गिरिडीह के परियाना स्थित यूनानी चिकित्सा महाविद्यालय की उपेक्षा ने एक बार फिर सरकारी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करोड़ों की लागत से बने इस कॉलेज का संचालन आज तक शुरू नहीं हो पाया, नतीजतन भवन जर्जर हो रहे हैं, दवाइयाँ सड़ रही हैं और कक्षाओं में धूल-जाले जमे पड़े हैं। हाल ही में निरीक्षण करने पहुँचे सामाजिक कार्यकर्ता चाँद रशीद खान, सैयद सबिह अशरफ और खुर्शीद अनवर हादी ने कॉलेज की बदहाली पर गहरी चिंता जताई।

कार्यकर्ताओं ने कहा कि यदि इस संस्थान को चालू किया जाए तो झारखंड के युवाओं को यूनानी पद्धति की पढ़ाई के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा, साथ ही अस्पताल शुरू होने से गरीबों को सस्ती व असरदार चिकित्सा मिल सकेगी और नियुक्तियों से रोज़गार के अवसर भी बढ़ेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने तत्काल कदम नहीं उठाए तो आंदोलनात्मक कार्यक्रम शुरू करना पड़ेगा।













