इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें लगातार गिर रही हैं, लेकिन इसका असर भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर बिल्कुल नहीं दिख रहा है। रूस से सस्ता तेल खरीदने के बावजूद आम जनता की जेब पर बोझ कम नहीं हुआ है। वित्त वर्ष 2025 की रिपोर्ट साफ बताती है कि पेट्रोलियम कंपनियां एक लीटर पेट्रोल पर 11.2 रुपये और डीजल पर 8.1 रुपये का मुनाफा कमा रही हैं। इसके बावजूद पेट्रोल-डीजल के दाम घटाए नहीं जा रहे हैं। आखिरी बार 2024 में कीमतों में मामूली कमी की गई थी, लेकिन अब तक आम लोगों को कोई राहत नहीं मिली है।
अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार की बात करें तो ब्रेंट क्रूड ऑयल 72 डॉलर से गिरकर 67.10 डॉलर प्रति बैरल पर आ चुका है। यानि करीब 7.5% की गिरावट के बावजूद भारत में पेट्रोल 90 रुपये से ऊपर और कई राज्यों में 100 रुपये प्रति लीटर से भी ज्यादा में बिक रहा है। सवाल यह है कि जब कंपनियां अरबों का मुनाफा कमा रही हैं, तो आम जनता को सस्ते पेट्रोल-डीजल का फायदा क्यों नहीं दिया जा रहा? क्या यह सरकार और कंपनियों की नीतिगत विफलता नहीं है?
जनता की गाढ़ी कमाई हर दिन पेट्रोल पंप पर जल रही है। महंगाई पहले से ही लोगों की कमर तोड़ रही है और अब पेट्रोल-डीजल के ऊंचे दाम से हालात और बिगड़ते जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार चाहे तो टैक्स में कटौती कर राहत दे सकती है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। ऐसे में यह सवाल सीधे-सीधे आपकी जेब से जुड़ा हुआ है कि सस्ता कच्चा तेल कंपनियों और सरकार की तिजोरी भर रहा है या देश की जनता को राहत भी मिलेगी।












