गिरिडीह में भाई-बहन के अटूट प्रेम का पर्व रक्षाबंधन धूमधाम से मनाया गया। बहनों ने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर मंगलकामनाएं दीं और कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनसे जीवनभर सुरक्षा का वचन लिया। यह पर्व न केवल रिश्तों की पवित्रता और स्नेह की गरिमा का प्रतीक है, बल्कि आपसी विश्वास और सम्मान का भी संकल्प दिलाता है।

कई लोगों ने पर्यावरण संरक्षण के लिए वृक्षों को भी राखी बांधकर उन्हें बचाने का प्रण लिया।धार्मिक मान्यता के अनुसार, रक्षाबंधन की परंपरा पौराणिक कथाओं से जुड़ी है।

द्रौपदी द्वारा भगवान कृष्ण की कलाई पर कपड़ा बांधने की कथा हो या गुरु-शिष्य के बीच सम्मान और सुरक्षा का वचन, यह पर्व रिश्तों की गहराई और जिम्मेदारी निभाने का संदेश देता है। श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह उत्सव भाई-बहन के प्रेम, वचन और संरक्षण की अनमोल डोर को हमेशा मजबूत बनाए रखने का अवसर है।












