दिल्ली में बढ़ते अपराध ने एक बार फिर कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल ही में बॉलीवुड एक्ट्रेस हुमा कुरैशी के चचेरे भाई आसिफ कुरैशी की निजामुद्दीन इलाके में हुई हत्या ने राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था की सच्चाई सामने रख दी है। 8 अगस्त 2025 को जंगपुरा भोगल लेन में पार्किंग विवाद के चलते धारदार हथियार से हमला कर उनकी जान ले ली गई। यह घटना कोई अपवाद नहीं, बल्कि उस डरावनी हकीकत का हिस्सा है जो दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में रोज घट रही है—जहां कहीं चोरी-लूट आम है तो कहीं हत्या और बलात्कार जैसे संगीन अपराध।
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) की 2022 रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली देश में सबसे ज्यादा क्राइम रेट वाला शहर है। प्रति लाख जनसंख्या पर 1,783.6 अपराध दर्ज हुए, जो किसी भी बड़े शहर से कहीं ज्यादा है। सिर्फ महिलाओं के खिलाफ ही 4,45,256 मामले दर्ज हुए, जबकि हत्या के 501 केस राजधानी को 19 महानगरों में पहले स्थान पर रखते हैं। आंकड़े बताते हैं कि साउथ-वेस्ट दिल्ली का सागरपुर महिलाओं के खिलाफ अपराध में कुख्यात है, यमुनापार का न्यू उस्मानपुर हिंसक वारदातों के लिए जाना जाता है, जबकि सुल्तानपुरी, निहाल विहार और प्रेम नगर छेड़छाड़ और यौन शोषण में बदनाम हैं। नरेला-बवाना गैंगस्टर गतिविधियों का गढ़ हैं, और खजूरी खास, रोहिणी, प्रशांत विहार में हत्या और लूट की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अपराध के बढ़ते ग्राफ के पीछे कई वजहें हैं—कानून का धीमा क्रियान्वयन, पुलिस बल की कमी और सामाजिक तंत्र में बढ़ती हिंसक प्रवृत्तियां। NCRB के पुराने आंकड़े बताते हैं कि 2016 में ही दिल्ली हत्या के मामलों में देश का सबसे खतरनाक शहर थी, और अब हालात और बिगड़ गए हैं। सवाल साफ है—क्या देश की राजधानी अपराधियों के लिए एक ‘सेफ जोन’ बन चुकी है?












