बिहार में शिक्षकों के ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि अब अंतर जिला स्थानांतरण चाहने वाले शिक्षकों से तीन पसंदीदा जिलों का विकल्प लिया जाएगा और उन्हीं में से किसी एक जिले में उन्हें पदस्थापित किया जाएगा। गुरुवार सुबह मुख्यमंत्री ने अपने एक्स (Twitter) हैंडल से यह जानकारी साझा करते हुए शिक्षा विभाग को निर्देश जारी किया। इस फैसले का मकसद शिक्षकों की पारिवारिक और सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए स्थानांतरण प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाना है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जिले के अंदर ट्रांसफर का कार्य जिला पदाधिकारी की समिति द्वारा किया जाएगा, जिससे शिक्षकों को उनकी पसंद के प्रखंड या उनके नजदीकी स्थान पर नियुक्ति मिल सके। उन्होंने शिक्षकों से अपील करते हुए कहा कि वे स्थानांतरण को लेकर चिंतित न हों और पूरी निष्ठा के साथ बच्चों की शिक्षा में योगदान दें। मुख्यमंत्री का यह निर्णय उन हजारों शिक्षकों के लिए राहत की खबर लेकर आया है, जो लंबे समय से ट्रांसफर की मांग कर रहे थे।
इस बीच राज्य में शिक्षक नियुक्ति के चौथे (TRE-4) और पाँचवें (TRE-5) चरण की तैयारियाँ भी तेज़ हो गई हैं। शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने जानकारी दी कि जल्द ही चौथे चरण की बहाली प्रक्रिया शुरू होगी। इसके साथ ही बिहार सरकार ने 40% डोमिसाइल नीति लागू कर दी है, जिससे राज्य के 85 से 86% युवाओं को प्राथमिकता मिलेगी। इन बदलावों से शिक्षा व्यवस्था को मज़बूती मिलेगी और शिक्षकों में सरकार के प्रति भरोसा भी बढ़ेगा। यह कदम बिहार के भविष्य को संवारने की दिशा में एक मजबूत और संवेदनशील पहल के रूप में देखा जा रहा है।












