बिहार के पवित्र नगरी गया के अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का नाम इन दिनों विवादों में है। एयरपोर्ट के तीन अक्षरों वाले IATA कोड GAY को लेकर बीजेपी के राज्यसभा सांसद डॉ. भीम सिंह ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि ‘गे’ शब्द समाज में अपमानजनक माना जाता है, इसलिए इस कोड को बदला जाना चाहिए। लेकिन इस बयान के बाद LGBTQ+ समुदाय के कार्यकर्ताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और इसे समुदाय के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण टिप्पणी बताते हुए सांसद से माफ़ी मांगने की मांग की है।
लेकिन सवाल सिर्फ LGBTQ से जुड़ा नहीं है। ‘Gay’ शब्द का इतिहास और प्रयोग केवल एक समुदाय तक सीमित नहीं है। अंग्रेजी भाषा में यह शब्द खुशी, उल्लास और आज़ादी के भाव से भी जुड़ा है। अमेरिका में 1962 में Gay Toys नाम की कंपनी भी थी जो बच्चों के लिए प्लास्टिक खिलौने बनाती थी। इसके अलावा कई देशों में Gay Literature यानी समलैंगिक पुरुषों के अनुभवों पर आधारित साहित्य और ‘Gay Villages’ नामक व्यवसायिक केंद्र भी मौजूद हैं जहां समानता और पहचान के साथ समुदाय के लोग रहते और काम करते हैं।
गया एयरपोर्ट का कोड GAY दरअसल इंटरनेशनल एविएशन मानकों के तहत उसी शहर के पहले तीन अक्षरों पर आधारित होता है। जैसे DEL दिल्ली का, PAT पटना का, वैसे ही GAY गया का। ऐसे में केवल शब्द के भावनात्मक अर्थों को लेकर कोड बदलने की मांग क्या एक तर्कसंगत कदम है? या यह LGBTQ+ समुदाय के खिलाफ एक और सामाजिक असहिष्णुता का संकेत?












