झारखंड के आदिवासी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का सोमवार को दिल्ली के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। 81 वर्ष की उम्र में उनका निधन होने पर उनके पैतृक गांव नेमरा में शोक की लहर दौड़ गई। पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार नेमरा के बड़का नाला श्मशान घाट पर आदिवासी परंपराओं के अनुसार संपन्न हुआ। मुख्यमंत्री और उनके पुत्र हेमंत सोरेन ने चिता को मुखाग्नि दी, जबकि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और कई अन्य राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेता भी अंतिम विदाई देने पहुंचे।
राजनीतिक और सामाजिक रूप से गहरे प्रभाव वाले शिबू सोरेन के अंतिम दर्शन के लिए दूर-दूर से भारी जनसैलाब उमड़ा। रांची से उनके पार्थिव शरीर को पैतृक गांव ले जाते हुए रास्ते में लोगों ने सड़क किनारे खड़े होकर ‘गुरुजी अमर रहें’ के नारों के साथ श्रद्धांजलि दी। शोक में डूबे गांव नेमरा और रांची में अधिकांश दुकानें और कार्यालय बंद रहे, वहीं झारखंड सरकार ने तीन दिनों का राजकीय शोक घोषित किया है। झारखंड की जनता ने इस महान आदिवासी नेता को भावभीनी विदाई दी, जिनका राजनीतिक और सामाजिक योगदान आज भी आदिवासी समाज के लिए प्रेरणा है।
इस दुखद अवसर पर राजद के तेजस्वी यादव, आम आदमी पार्टी के संजय सिंह, तृणमूल कांग्रेस की शताब्दी रॉय और कई अन्य नेता भी नेमरा पहुंच कर शोक संवेदनाएं व्यक्त कीं। झारखंड के स्कूलों में भी दिवंगत नेता की आत्मा की शांति के लिए विशेष प्रार्थना की गई। शिबू सोरेन के निधन से झारखंड के आदिवासी समुदाय और राजनीति में एक युग का अंत हुआ है, लेकिन उनकी विरासत सदैव याद रखी जाएगी।












