रात के तीसरे पहर जब पूरी दुनिया गहरी नींद में थी, तब उज्जैन की पावन भूमि पर एक अलौकिक दृश्य घटित हो रहा था… बाबा महाकाल अपने निराकार से साकार रूप में अवतरित हो चुके थे। नाग पंचमी के इस पवित्र दिन पर भस्म आरती की वो रहस्यमयी छटा, वो धुएं में लिपटा शिवलिंग, और हजारों भक्तों का ‘हर हर महादेव’ का घोष… मानो समय रुक गया हो। नागों, रुद्राक्ष और भांग से विशेष श्रृंगार ने बाबा को दिव्यता की उस सीमा पर पहुंचा दिया जहां केवल आस्था की भाषा बोली जाती है।
नाग पंचमी के पावन अवसर पर उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार तड़के 3 बजे भस्म आरती का आयोजन हुआ। इस बार बाबा का श्रृंगार अत्यंत अद्भुत और चमत्कारी था — शिवलिंग पर सजी सर्पमालाएं, मस्तक पर कमल का फूल और पूरे शरीर पर भांग व रुद्राक्ष की दिव्य सजावट। भस्म आरती से पूर्व भगवान वीरभद्र की पूजा की गई, और चांदी के द्वार खुलते ही जैसे ही गर्भगृह का पट खुला — श्रद्धालुओं की आँखों में आस्था के अश्रु छलक पड़े। हर ओर ‘जय श्री महाकाल’ के नारों से वातावरण भक्तिमय हो गया।
पुजारी पं. महेश शर्मा ने बताया कि पंचमी तिथि पर हर साल भस्म आरती का विशेष महत्व होता है। पूजन का प्रारंभ जलाभिषेक से हुआ, जिसमें दूध, दही, घी, शक्कर, पंचामृत और फलों के रस से बाबा को स्नान कराया गया। इसके बाद बाबा को हरि ओम जल अर्पित कर कपूर आरती और भस्म अर्पण किया गया। भस्म अर्पण के पश्चात महाकाल ‘निराकार से साकार’ रूप में प्रकट होते हैं, ऐसी मान्यता है। इस अनुष्ठान को देखने देशभर से हजारों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे, जिन्होंने अपनी आंखों से चमत्कार को अनुभव किया।
महाकाल मंदिर प्रबंधन समिति के प्रशासक कौशिक ने बताया कि श्रावण के तीसरे सोमवार तक अब तक 4 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। मंगलवार को आयोजित चलित भस्म आरती में 14,000 से अधिक भक्त शामिल हुए। दर्शन को व्यवस्थित और सरल बनाने के लिए मंदिर समिति ने विशेष व्यवस्थाएं की थीं — जैसे चलित दर्शन, प्राथमिक चिकित्सा शिविर, जल वितरण केंद्र और भीड़ नियंत्रण के लिए CCTV निगरानी।












