मानसून का जादू इस बार झारखंड पर कुछ ज्यादा ही बरसा है… लेकिन इस बरसात में राहत से ज्यादा चिंता की बारिश है। जहां एक ओर खेतों में हरियाली लहराने लगी है, वहीं दूसरी ओर आसमान से गिरती बिजली और बाढ़ की आशंका ने लोगों की नींद उड़ा दी है। भारतीय मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि संताल परगना, बोकारो, धनबाद, गिरिडीह जैसे जिलों में 30 जुलाई तक भारी बारिश का खतरा है। इसके साथ ही तेज हवाओं और वज्रपात की संभावना ने हालात और गंभीर बना दिए हैं। सवाल ये है कि क्या ये बारिश वरदान है या आने वाली कोई बड़ी मुसीबत?
रांची स्थित मौसम केंद्र के वैज्ञानिक अभिषेक आनंद के अनुसार, इस समय मानसून ट्रफ लाइन बंगाल की खाड़ी से झारखंड के ऊपर से गुजर रही है, जिसकी वजह से राज्य के विभिन्न हिस्सों में जोरदार बारिश दर्ज की जा रही है। झारखंड में अब तक 732.7 मिमी बारिश हो चुकी है, जो औसत 478.3 मिमी से 53% अधिक है। राजधानी रांची में तो 965.7 मिमी बारिश हो चुकी है, जो सामान्य वर्षा से लगभग दोगुनी (96%) है। राज्य का तापमान भी सामान्य से एक से दो डिग्री सेल्सियस नीचे चल रहा है, जो यह बताता है कि मौसम का मिज़ाज फिलहाल कुछ ज्यादा ही भीगा हुआ है।
29 और 30 जुलाई को झारखंड के पूर्वी और उत्तरी जिलों में भारी बारिश के साथ-साथ तेज हवाओं और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की गई है। गोड्डा जिले में अधिकतम तापमान 32.6 डिग्री दर्ज किया गया, जबकि रांची 27.6 डिग्री तक ही पहुंच पाया। इसका मतलब है कि भारी नमी और ठंडी हवाएं राज्य के अधिकांश हिस्सों में बनी हुई हैं। प्रशासन ने ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों से अपील की है कि पेड़ों के नीचे ना रहें, खुले मैदान से दूर रहें और वज्रपात के समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल ना करें।
हालांकि मौसम विभाग ने यह भी साफ किया है कि 31 जुलाई के बाद मानसून कमजोर हो जाएगा, लेकिन तब तक हालात किसी भी समय विकराल रूप ले सकते हैं। सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग को अलर्ट पर रखा गया है, लेकिन झारखंड के सुदूर ग्रामीण इलाके, जहां संचार और पहुंच सीमित है, वहां लोगों तक चेतावनी समय पर पहुंचे — यह एक बड़ी चुनौती है।












