क्या आप कभी सोच सकते हैं कि Rolls-Royce जैसी लग्जरी कार आपके बजट में आ सकती है? नहीं ना? लेकिन अब यह सपना हकीकत बनने के बेहद करीब है। भारत और ब्रिटेन के बीच हुए ऐतिहासिक Free Trade Agreement (FTA) ने वो रास्ता खोल दिया है, जिसकी उम्मीद सिर्फ अरबपतियों को होती थी। ये कोई अफवाह नहीं, सरकार द्वारा आधिकारिक रूप से साइन की गई डील है, जिसका सीधा असर पड़ेगा आपके गैरेज और बैंक बैलेंस पर! लेकिन… इस डील में ऐसा क्या है जो सिर्फ कुछ लोगों को ही मिलेगा फायदा?
ब्रिटेन और भारत के बीच हाल ही में हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के तहत दोनों देशों ने एक बड़ी आर्थिक साझेदारी की है। इस समझौते के बाद, ब्रिटेन से भारत आने वाली लग्जरी कारों की इंपोर्ट ड्यूटी को 110% से घटाकर सिर्फ 10% कर दिया गया है। अब तक एक विदेशी लग्जरी कार की कीमत भारत में उसकी असल कीमत से लगभग दोगुनी हो जाती थी, लेकिन इस फैसले से ये कारें काफी हद तक सस्ती हो जाएंगी। खास बात यह है कि यह कदम ऐसे समय में आया है जब अमेरिका की टैरिफ नीतियों से वैश्विक व्यापार अस्थिरता की ओर बढ़ रहा है। इस समझौते से ना केवल कारोबारी रिश्ते मज़बूत होंगे, बल्कि आम भारतीय ग्राहक को भी विदेशी गुणवत्ता का स्वाद कम दाम में मिलेगा।
अब आप सोच रहे होंगे कि क्या हर ब्रिटिश कार सस्ती हो जाएगी? जवाब है—नहीं। इस FTA में केवल उन्हीं लग्जरी गाड़ियों को टैक्स छूट मिलेगी जिनकी कीमत £80,000 (यानी करीब 93.5 लाख रुपये) से अधिक है। इसका मतलब यह है कि Land Rover, Bentley, Aston Martin, Lotus, McLaren, Rolls-Royce और Jaguar जैसी गाड़ियां अब आम भारतीय अमीरों की पहुंच के भीतर आ सकती हैं। लेकिन छोटी या मिड-साइज़ कारें, जैसे जो £40,000 (करीब 46.5 लाख रुपये) से कम की हैं, उन्हें इस छूट से बाहर रखा गया है। यह कदम इसलिए लिया गया है ताकि भारत का घरेलू ऑटोमोबाइल उद्योग—जो Maruti, Tata, Mahindra जैसी कंपनियों से बना है—बिना विदेशी दबाव के विकसित हो सके।
जो लोग पर्यावरण के लिहाज से इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड या हाइड्रोजन कारें खरीदना चाहते हैं, उनके लिए यह समझौता अभी राहत नहीं लाया है। इस FTA में स्पष्ट किया गया है कि पहले 5 वर्षों तक EV, Hybrid और Hydrogen वाहनों पर किसी भी प्रकार की टैक्स छूट नहीं मिलेगी। सरकार का मकसद साफ है—घरेलू EV कंपनियों जैसे Tata EV, Mahindra EV, और Hyundai EV को खुला मैदान देना, ताकि वे विदेशी दबाव के बिना अपनी तकनीक विकसित कर सकें। इससे भारत की आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा और विदेशी कंपनियों की दादागिरी से घरेलू बाजार बच सकेगा।
इस India-UK FTA को लेकर जहां एक ओर हाई-एंड कार बाजार में उत्साह की लहर है, वहीं दूसरी ओर मिड-सेगमेंट और पर्यावरण-हितैषी ग्राहकों को अभी भी इंतज़ार करना पड़ेगा। हालांकि इस डील से ब्रिटिश प्रीमियम कार ब्रांड्स को भारत में बड़ा बाजार मिलेगा, लेकिन यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले वर्षों में भारत सरकार इस नीति को किस दिशा में ले जाती है। क्या भविष्य में EVs को भी टैक्स छूट दी जाएगी? क्या भारतीय सड़कों पर अब Rolls-Royce और Bentley की संख्या बढ़ेगी? ये सवाल अब सिर्फ अटकल नहीं, बल्कि संभावनाएं बन चुके हैं।












