बोकारो (झारखंड) – बोकारो से कांग्रेस विधायक श्वेता सिंह की मुश्किलें अब बढ़ती नजर आ रही हैं। उनके खिलाफ उठे आरोपों का मामला अब झारखंड राजभवन तक पहुंच चुका है। भाजपा के चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल संतोष गंगवार से मिलकर विधायक श्वेता सिंह के खिलाफ गंभीर अनियमितताओं की शिकायत दर्ज कराई है। इस प्रतिनिधिमंडल में राज्यसभा सांसद आदित्य साहू, रांची विधायक सीपी सिंह, बोकारो के पूर्व विधायक बिरंची नारायण और प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष राकेश प्रसाद शामिल थे। उन्होंने राज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन में विधायक पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
भाजपा का कहना है कि श्वेता सिंह ने विधानसभा नामांकन के समय कई जानकारियाँ छुपाई थीं। आरोप है कि उन्होंने बीएसएल (एचएससीएल पूल) द्वारा आवंटित सरकारी क्वार्टर के नो ड्यूज सर्टिफिकेट को शपथ पत्र के साथ नहीं जोड़ा और गलत जानकारी दी। इसके साथ ही भाजपा ने दावा किया है कि विधायक श्वेता सिंह के पास चार वोटर आईडी कार्ड और दो पैन कार्ड हैं, जो कानून के खिलाफ है। इस मामले में भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने भारत निर्वाचन आयोग और आयकर विभाग के दिशा-निर्देशों के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
इस पूरे विवाद की शुरुआत श्वेता सिंह के नाम से दो अलग-अलग पैन कार्ड होने की खबर से हुई। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों पैन कार्ड में उनके पिता के नाम अलग-अलग हैं। एक कार्ड रामगढ़ से बना है जिसमें पिता का नाम संग्राम सिंह है, जबकि दूसरे कार्ड में पिता का नाम दिनेश कुमार सिंह दर्ज है और वह गुरुग्राम से जारी हुआ है। यहां उल्लेखनीय है कि संग्राम सिंह, श्वेता सिंह के पति हैं, लेकिन पैन कार्ड में पति के नाम को पिता के स्थान पर दर्ज करना नियमों के खिलाफ है। इससे संदेह और गहरा हो गया है।
दोनों पैन कार्ड में जन्मतिथि एक जैसी — 19 जून 1984 — दर्ज है, लेकिन नाम की स्पेलिंग भी अलग-अलग है। एक में SHWETA SINGH और दूसरे में SHWETTAA SINGH लिखा गया है। इन गड़बड़ियों से न सिर्फ नियमों का उल्लंघन हुआ है बल्कि पहचान की सच्चाई पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। भाजपा का कहना है कि यह सीधे-सीधे फर्जीवाड़े का मामला है और इससे जुड़ी सभी जानकारियों की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। अब देखना होगा कि राज्यपाल इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और जांच एजेंसियां किस दिशा में काम शुरू करती हैं।.












