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कलयुगी माँ ने नवजात को जंगल में फेंका, माँ बनने की आस में तड़पती महिला ने सीने से लगाया – लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था”

गिरिडीह जिले के पिरटांड थाना क्षेत्र के मधुपुर के बाँध गांव से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने समाज को झकझोर कर रख दिया है। जंगल में एक कलयुगी माँ ने अपनी नवजात बच्ची को बेरहमी से फेंक दिया, जहाँ से उस मासूम की कराहती आवाजें ममता की प्रतीक बनी कुंती देवी के कानों तक पहुँचीं। कुंती देवी रोज की तरह अपनी बकरियाँ चराने जंगल गई थीं, लेकिन उस दिन उन्हें जंगल में कुछ अलग महसूस हुआ। बच्ची की चीखें सुनकर जब वह पास पहुँचीं, तो देखा कि एक नवजात बच्ची घायल हालत में जमीन पर पड़ी हुई थी। यह दृश्य देख वह कांप उठीं, और तुरंत अपने रिश्तेदार तिलेश्वरी देवी को सूचना दी।
तिलेश्वरी देवी, जो शादी के बाद से संतान सुख से वंचित थीं, बच्ची को गोद लेने के लिए खुशी-खुशी तैयार हो गईं। वह कुंती देवी के साथ तुरंत जंगल पहुँचीं और नवजात को गोद में उठाकर सीने से लगा लिया। लेकिन जैसे ही उन्होंने बच्ची को पास से देखा, तो पता चला कि उसके सिर पर गंभीर चोट है। बिना समय गँवाए तिलेश्वरी उसे नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले गईं, जहाँ डॉक्टरों ने काफी कोशिशों के बाद बताया कि बच्ची की सांसें थम चुकी हैं। यह खबर सुनते ही तिलेश्वरी फूट-फूट कर रोने लगीं। अस्पताल का माहौल पल भर में मातम में बदल गया।

पीरटांड थाना को घटना की सूचना दी गई, और पुलिस मौके पर पहुँची। कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद बच्ची के शव को पोस्टमार्टम के लिए गिरिडीह सदर अस्पताल भेज दिया गया। इस दौरान तिलेश्वरी देवी ने नवजात को भारी मन से स्वास्थ्यकर्मियों को सौंपा। कुछ ही पल सही, लेकिन उन्होंने उस मासूम को सीने से लगाकर माँ बनने के अपने अधूरे सपने को कुछ हद तक जी लिया। बच्ची के जाने के बाद उनके चेहरे पर गहरी खामोशी छा गई, और आँखों से आँसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे।

इस हृदय विदारक घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। समाज में जहाँ एक तरफ माँ बनने की तड़प में महिलाएं हर रोज दुआएँ माँगती हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ महिलाएं अपने नवजात बच्चों को इस निर्दयी तरीके से मरने के लिए छोड़ देती हैं। तिलेश्वरी देवी का दर्द हर उस महिला की आवाज बन गया है, जो माँ बनने का सपना देखती है। उन्होंने कहा, “अगर कोई अपनी औलाद को पाल नहीं सकता है, तो मुझे दे दे, मैं उसे अपनी हैसियत के अनुसार पाल लूंगी, लेकिन कृपया किसी मासूम को मरने के लिए जंगल में मत छोड़िए।” यह एक संदेश है पूरे समाज के लिए, जो ममता और इंसानियत को एक बार फिर सोचने पर मजबूर करता है।

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