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20 दिन पाकिस्तान की कैद में रहा जवान – लौट आया अपने वतन, “ऑपरेशन सिंदूर” की चौंका देने वाली सफलता!

23 अप्रैल की एक मामूली सुबह, लेकिन बीएसएफ के लिए एक बड़ा झटका – फिरोजपुर सेक्टर से कांस्टेबल पी.के. साहू गलती से पाकिस्तान की सीमा में दाखिल हो गए। आमतौर पर ऐसी घटनाओं में जल्दी वापसी हो जाती है, लेकिन इस बार मामला फंसा रहा। पाकिस्तान ने न सिर्फ फ्लैग मीटिंग टाली बल्कि भारत की लगातार अपीलों को भी नज़रअंदाज़ किया। हर बीतता दिन एक नया तनाव लेकर आता रहा – जवान के परिवार से लेकर पूरी फोर्स और देश की निगाहें बस एक सवाल पर टिकी थीं – क्या पी.के. साहू सुरक्षित हैं?

भारत ने अपनी रणनीति में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं दिखाई। हर स्तर पर पाकिस्तान पर कूटनीतिक दबाव बनाया गया। बीएसएफ की नियमित कार्यवाहियों से लेकर विदेश मंत्रालय की बातचीत तक, हर मोर्चे पर सक्रियता बनी रही। लेकिन पाकिस्तान की बेरुखी और चुप्पी इस बार असामान्य थी। इसी बीच “ऑपरेशन सिंदूर” की योजना सामने आई – एक ऐसा दबाव तंत्र जिसमें सैन्य, कूटनीतिक और खुफिया एजेंसियों ने मिलकर पाकिस्तान को झुकने पर मजबूर किया। 20 दिन बाद अटारी-वाघा बॉर्डर पर सुबह 10:30 बजे जब पी.के. साहू की वापसी हुई, तो वो सिर्फ एक सैनिक की वापसी नहीं थी – वो था भारत की ताकत और उसके अपने लोगों के लिए लड़ने का वादा।

साहू की वापसी के साथ ही अगला चरण शुरू हुआ – मेडिकल परीक्षण, मानसिक स्थिति की जांच और खुफिया एजेंसियों द्वारा डिब्रीफिंग। यह जानना ज़रूरी है कि पाकिस्तान में उनके साथ कैसा व्यवहार हुआ, उनसे क्या जानकारी जुटाने की कोशिश की गई और किन हालात में उन्हें रखा गया। सुरक्षा एजेंसियां यह सुनिश्चित करेंगी कि कोई संवेदनशील जानकारी लीक न हुई हो। इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद ही वह अपने परिवार से मिल पाएंगे और फिर देश की सेवा में लौट सकेंगे। लेकिन इस इंतजार में इस बार सुकून है – क्योंकि जवान सकुशल लौट आया है।

इस पूरी घटना ने भारत को एक बड़ा संदेश दिया है – एकता और दबाव के ज़रिए हर चुनौती को पार किया जा सकता है। अब देश की निगाहें पश्चिम बंगाल के उस जवान पर हैं, जो अभी भी पाकिस्तान की हिरासत में बताया जा रहा है। उसकी पत्नी की पुकार अब हर भारतीय की आवाज़ बन चुकी है। “ऑपरेशन सिंदूर” की सफलता ने ये दिखा दिया है कि अगर सरकार, सेना और मीडिया एकजुट हो जाएं, तो कोई भी भारतीय दुश्मन के कब्जे में नहीं रहेगा। पी.के. साहू की वापसी एक नई उम्मीद की शुरुआत है – और यह वादा भी, कि देश अपने हर बेटे को वापस लाने के लिए हर मुमकिन कोशिश करेगा।

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