नई दिल्ली: वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत की न्यायिक प्रणाली में लगभग 5 करोड़ छोटे अपराधों से संबंधित लंबित मामलों का अंबार लगा हुआ है, जिनमें से अधिकांश मामले अदालतों तक पहुंचने ही नहीं चाहिए थे। संसद द्वारा जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किए जाने के एक दिन बाद उन्होंने यह बात कही।
इस विधेयक में लगभग 1,000 छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने और उन्हें तर्कसंगत बनाने का प्रावधान है।
गोयल ने कहा कि सरकार केंद्र सरकार स्तर पर कानूनों की समीक्षा के लिए और सुझावों का स्वागत करती है।शुक्रवार को पीयूष गोयल ने बयान जारी करते हुए कहा कि हमें उम्मीद है कि अभियोजक अदालतों से नए प्रावधानों के आधार पर इन मामलों को बंद करने का अनुरोध करके इन्हें सुलझा सकते हैं, जिससे लंबित मामलों को बड़ी राहत मिल सकेगी।
उन्होंने आगे कहा कि हम अदालतों से अनुरोध करेंगे कि वे इन छोटे अपराधों पर निर्णय लें और इन्हें समाप्त करें।












