गिरिडीह में धूमधाम से मनाई गई गणगौर पूजा, पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं ने की शिव-पार्वती की आराधना, गीत-संगीत के बीच हुआ प्रतिमा विसर्जन, दिखी उत्साह और आस्था की झलक
गिरिडीह। मारवाड़ी समाज की महिलाओं द्वारा हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी गणगौर पूजा पूरे उत्साह, श्रद्धा और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाई गई। शनिवार को शहर के बरवाडीह स्थित मानसरोवर तालाब परिसर में जीणमाता मंगल पाठ समिति के तत्वावधान में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं।कार्यक्रम के दौरान नवविवाहित महिलाएं पारंपरिक परिधानों में सजी-धजी नजर आईं। हाथों में मेंहदी, माथे पर बिंदी और रंग-बिरंगे परिधानों के साथ महिलाएं पूरे उल्लास के साथ पूजा में सम्मिलित हुईं।

महिलाओं ने विधि-विधान के साथ भगवान शिव और माता पार्वती (गणगौर) की पूजा-अर्चना की तथा अपने परिवार की सुख-समृद्धि, अखंड सौभाग्य और वैवाहिक जीवन की खुशहाली की कामना की। पूजा के बाद गणगौर माता की प्रतिमाओं का विसर्जन कार्यक्रम बड़े ही भक्तिमय और उत्साहपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ।महिलाएं समूह में पारंपरिक गीत गाते और नृत्य करते हुए तालाब तक पहुंचीं। इस दौरान वातावरण पूरी तरह से भक्तिमय हो गया। विसर्जन के समय महिलाओं ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर खुशी का इजहार किया और पर्व की शुभकामनाएं दीं।

कार्यक्रम में उषा डोकानिया, माया बसयवतिया, किरण मोदी, रीता संथालिया, कविता डोकानिया, बबीता डोकानिया, पूनम डोकानिया, सरिता बस्वतिया, कविता रजगढ़िया, रिया अग्रवाल सहित कई गणमान्य महिलाएं और समाज की अन्य सदस्य मौजूद रहीं।

पूरे आयोजन में पारंपरिक लोक संस्कृति, सामाजिक एकता और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी की झलक स्पष्ट रूप से देखने को मिली। इस आयोजन ने न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत किया, बल्कि समाज में आपसी प्रेम और सौहार्द का संदेश भी दिया।












