गिरिडीह – भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) के कद्दावर नेता और जनप्रिय जननेता स्वर्गीय महेन्द्र सिंह के 21वें शहादत दिवस पर शुक्रवार को बगोदर में श्रद्धा, संकल्प और संघर्ष का अभूतपूर्व नजारा देखने को मिला। हजारों की संख्या में जुटे ग्रामीणों, मजदूरों, किसानों और युवाओं ने अपने प्रिय नेता को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस अवसर पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में भाकपा (माले) के राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, पार्टी के वरिष्ठ नेता, जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता एवं विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान शहीद महेन्द्र सिंह के संघर्षपूर्ण जीवन और जनआंदोलनों में उनकी भूमिका को याद किया गया।

गौरतलब है कि 16 जनवरी 2005 को गिरिडीह जिले में एक चुनावी सभा को संबोधित करने के दौरान नक्सलियों द्वारा महेन्द्र सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने न केवल झारखंड बल्कि पूरे देश की राजनीति को झकझोर दिया था। गरीबों, मजदूरों, किसानों और शोषित वर्गों की बुलंद आवाज रहे महेन्द्र सिंह ने अपना पूरा जीवन अन्याय, सामंती शोषण, भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग के खिलाफ संघर्ष में समर्पित कर दिया।

सभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि महेन्द्र सिंह की शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी। उनके सपनों का समानता और न्यायपूर्ण समाज बनाने के लिए पार्टी और जनता का संघर्ष और तेज होगा। उन्होंने युवाओं से शहीद के विचारों को अपनाने और अन्याय के खिलाफ मुखर होने की अपील की।

कार्यक्रम के दौरान शहीद महेन्द्र सिंह अमर रहें, महेन्द्र सिंह जिंदाबाद और इंकलाब जिंदाबाद” के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। भारी जनसमूह यह दर्शाता रहा कि शहीद महेन्द्र सिंह 21 वर्ष बाद भी जनता के दिलों में जीवित हैं। शहादत दिवस ने उनके बलिदान के साथ-साथ उनकी विचारधारा को नई पीढ़ी के सामने मजबूती से प्रस्तुत किया।












