सिमुलतला (जमुई) शनिवार देर रात हावड़ा–पटना–दिल्ली मेन लाइन पर हुए भीषण रेल हादसे ने रेलवे सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सिमुलतला स्टेशन और टेलवा बाजार हाल्ट के बीच स्थित पुल संख्या 676 पर सीमेंट लदी एक मालगाड़ी अचानक दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसा इतना भयावह था कि मालगाड़ी के कुल 20 डिब्बे पटरी से उतर गए। इनमें से 9 डिब्बे हवा में उछलते हुए सीधे नीचे नदी में जा गिरे, जबकि 11 डिब्बे अप और डाउन दोनों पटरियों पर बिखर गए। गनीमत यह रही कि यह एक मालगाड़ी थी, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन यदि यही हादसा किसी यात्री ट्रेन के साथ होता, तो परिणाम बेहद भयावह हो सकते थे।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार शनिवार रात करीब 11:30 बजे जसीडीह से झाझा की ओर जा रही मालगाड़ी तेज रफ्तार में थी। जैसे ही ट्रेन टेलवा बाजार हाल्ट के समीप पुल संख्या 676 पर पहुंची, एक तेज धमाके की आवाज के साथ डिब्बे एक-एक कर पटरी से उतरने लगे। धमाका इतना जोरदार था कि आसपास के गांवों में लोग दहशत में घरों से बाहर निकल आए। इंजन अपने डिब्बों से अलग होकर करीब 400 मीटर आगे जाकर रुका। हादसे के बाद चालक और गार्ड ने सूझबूझ दिखाते हुए तुरंत सिमुलतला स्टेशन को सूचना दी। देर रात स्टेशन प्रबंधक अखिलेश कुमार, आरपीएफ ओपी प्रभारी रवि कुमार और पीडब्ल्यूआई रंधीर कुमार दलबल के साथ मौके पर पहुंचे और राहत-बचाव कार्य शुरू कराया गया।
इस हादसे ने इसलिए भी सनसनी फैला दी है क्योंकि जिस स्थान पर यह दुर्घटना हुई, उसका एक डरावना अतीत रहा है। ठीक इसी पुल संख्या 676 (बड़ुआ पुल) पर बीते 25 फरवरी की रात शरारती तत्वों ने रेलवे ट्रैक से दो फिश प्लेट और चार पेंड्रोल क्लिप खोल दी थीं। उस समय सियालदह से जयनगर जा रही गंगासागर एक्सप्रेस पेट्रोलिंग कर्मियों की सतर्कता से बाल-बाल बच गई थी। यदि उस दिन ट्रेन गुजर जाती, तो सैकड़ों यात्रियों की जान खतरे में पड़ सकती थी। अब उसी स्थान पर मालगाड़ी का इस तरह पटरी से उतरना महज संयोग है या फिर किसी गहरी साजिश का हिस्सा—यह सवाल रेलवे और सुरक्षा एजेंसियों के सामने खड़ा हो गया है।
इस दुर्घटना के बाद हावड़ा–दिल्ली रेलखंड पर परिचालन पूरी तरह ठप हो गया है। अप और डाउन दोनों लाइनें बाधित रहने से करीब दो दर्जन एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनें जसीडीह, झाझा और आसनसोल के बीच विभिन्न स्टेशनों पर फंसी हुई हैं। यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और स्टेशनों पर अफरा-तफरी का माहौल है। रेलवे प्रशासन युद्धस्तर पर राहत कार्य में जुटा है और कम से कम एक लाइन को जल्द से जल्द चालू करने की कोशिश की जा रही है। वहीं, इस हादसे को लेकर उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए जाने की संभावना जताई जा रही है, ताकि यह साफ हो सके कि यह तकनीकी खामी थी या फिर किसी साजिश के तहत रेल सुरक्षा से खिलवाड़ किया गया।












