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ग्रामीण भारत को नई मजबूती: शिवराज सिंह चौहान ने SHG सदस्यों से की राष्ट्रीय वर्चुअल वार्ता, वीबी-जी राम जी अधिनियम 2025 पर मंथन

622 जिलों के 35.29 लाख से अधिक प्रतिभागियों ने लिया भाग, अधिनियम के तहत कम से कम एक तिहाई लाभार्थी होंगी महिलाएं

ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए स्वयं सहायता समूहों से संवाद कर वीबी-जी राम जी अधिनियम 2025 के महिला-केंद्रित, रोजगार और आजीविका प्रावधानों को रेखांकित किया।

ग्रामीण विकास एवं कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से देशभर के स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) सदस्यों के साथ राष्ट्रीय स्तर की व्यापक वार्ता की। यह संवाद विकसित भारत गारंटी रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025—जिसे संक्षेप में वीबी-जी राम जी अधिनियम कहा जा रहा है—पर केंद्रित रहा। इस ऐतिहासिक वर्चुअल कार्यक्रम में देश के 622 जिलों, 4,912 ब्लॉकों और 2,55,407 गांवों से 35.29 लाख से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

वार्ता का प्रमुख उद्देश्य अधिनियम के प्रावधानों की जानकारी सीधे जमीनी स्तर तक पहुंचाना और एसएचजी सदस्यों के अनुभव, सुझाव व दृष्टिकोण को समझना था। कार्यक्रम में ग्रामीण विकास एवं संचार राज्य मंत्री डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी, ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान, स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशनों (एसआरएलएम) के सीईओ/निदेशक तथा अन्य हितधारक शामिल रहे।

अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वीबी-जी राम जी अधिनियम 2025 को ग्रामीण भारत के लिए “परिवर्तनकारी कानून” बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि सशक्त गांवों का निर्माण करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अधिनियम के तहत सभी लाभार्थियों में से कम से कम एक तिहाई महिलाएं होंगी। इसके साथ ही अकेली रहने वाली महिलाओं के लिए विशेष ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी किए जाएंगे, ताकि कार्य आवंटन में उन्हें प्राथमिकता मिल सके।

मंत्री ने कहा कि यह अधिनियम कृषि के चरम मौसमों के दौरान श्रम की उपलब्धता में संतुलन बनाए रखने का लचीलापन देता है। साथ ही जल सुरक्षा, आजीविका संवर्धन और सतत ग्रामीण विकास से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता देता है। उन्होंने भरोसा जताया कि स्थायी आजीविका अवसर और मजबूत ग्रामीण अवसंरचना गांवों को विकास के केंद्र के रूप में उभारेंगे, जिससे ग्रामीण संकट के कारण होने वाला पलायन काफी हद तक रुकेगा।

संवादात्मक सत्र के दौरान स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने अधिनियम से जुड़े सवाल पूछे, जिनका मंत्री ने विस्तार से उत्तर दिया। उन्होंने “दीदियों” को आश्वस्त किया कि केंद्र सरकार उनके कल्याण और सम्मानजनक भागीदारी के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

राज्य मंत्री डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी ने कहा कि वीबी-जी राम जी अधिनियम 2025 की सफलता में सामुदायिक भागीदारी और स्वामित्व की अहम भूमिका होगी। उन्होंने जोर दिया कि स्वयं सहायता समूह ग्रामीण अवसंरचना, सामुदायिक परिसंपत्तियों के निर्माण और प्रबंधन में महत्वपूर्ण योगदान देंगे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्थाएं मजबूत होंगी।

वहीं, राज्य मंत्री कमलेश पासवान ने अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि ग्रामीण परिवारों की आय सुरक्षा बढ़ाने के लिए वैधानिक रोजगार गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि जल सुरक्षा, पशुपालन आधारित आजीविका और टिकाऊ विकास से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।

कार्यक्रम की शुरुआत में ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव शैलेश कुमार सिंह ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि वीबी-जी राम जी की सफलता स्वयं सहायता समूहों, उनके संघों और पंचायती राज संस्थानों जैसे सामुदायिक संगठनों के मजबूत सामूहिक स्वामित्व पर निर्भर करेगी।

अंत में दी गई प्रस्तुति में अधिनियम की विशेषताओं, उद्देश्यों और कार्यान्वयन ढांचे को विस्तार से समझाया गया। इसमें महिला-केंद्रित प्रावधानों, शिकायत निवारण तंत्र, पालन-पोषण सुविधाओं और व्यक्तिगत संपत्ति सृजन वाले कार्यों पर विशेष जोर दिया गया, ताकि महिलाओं की गरिमापूर्ण और सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

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