उत्तर भारत में बढ़ते ठंड के प्रकोप और घने कोहरे ने रेल परिचालन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। बिहार के दानापुर रेल मंडल से गुजरने वाली एक दर्जन से अधिक ट्रेनें कई घंटों की देरी से चल रही हैं। कहीं ट्रेनें 1 घंटे लेट हैं तो कहीं यात्रियों को 7 से 8 घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है। हालात इतने खराब हैं कि स्टेशनों पर वेटिंग रूम फुल हो चुके हैं और मजबूरन यात्रियों को कड़ाके की ठंड में प्लेटफॉर्म पर ही रात गुजारनी पड़ रही है।
घने कोहरे के कारण ट्रेनों की रफ्तार काफी धीमी कर दी गई है। रेलवे सुरक्षा के मद्देनज़र सिग्नलिंग सिस्टम के तहत ट्रेनों को नियंत्रित गति से चलाया जा रहा है, लेकिन इसका सीधा असर यात्रियों की यात्रा पर पड़ रहा है। कई यात्रियों की कनेक्टिंग ट्रेनें छूट चुकी हैं, जिससे उनका सफर और भी मुश्किल हो गया है।
दानापुर स्टेशन पर रातभर अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला। यात्री ठंड से बचने के लिए कंबल और जैकेट में लिपटे प्लेटफॉर्म पर बैठे नजर आए। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ा। यात्रियों का कहना है कि रेलवे की ओर से न तो पर्याप्त सूचना दी जा रही है और न ही वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है।
यात्रियों ने आरोप लगाया कि वेटिंग रूम की क्षमता सीमित है और वह पहले ही भर चुका है। ऐसे में जो यात्री बाहर रह गए, उन्हें खुले प्लेटफॉर्म पर ही रात बितानी पड़ी। कई यात्रियों ने यह भी कहा कि ट्रेन लेट होने की सही जानकारी समय पर नहीं मिलती, जिससे वे असमंजस में फंसे रहते हैं।
इन ट्रेनों पर पड़ा सबसे ज्यादा असर:
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जयनगर पूजा स्पेशल – 7 घंटे 22 मिनट लेट
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कुंभ एक्सप्रेस – 6 घंटे 16 मिनट लेट
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गरीब रथ एक्सप्रेस – 3 घंटे 30 मिनट लेट
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विभूति एक्सप्रेस – 1 से 3.5 घंटे लेट
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इस्लामपुर-हटिया एक्सप्रेस – 3 घंटे लेट
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पटना एक्सप्रेस – 3 घंटे लेट
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फरक्का एक्सप्रेस – 2 घंटे 33 मिनट लेट
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अमृत भारत एक्सप्रेस – 2 घंटे 32 मिनट लेट
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दानापुर इंटरसिटी एक्सप्रेस – 1 से 2 घंटे 35 मिनट लेट
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कोटा-पटना एक्सप्रेस – 1 घंटा 15 मिनट से 2 घंटे 20 मिनट लेट
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अर्चना एक्सप्रेस – 2 घंटे लेट
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हिमगिरी एक्सप्रेस – 2 घंटे लेट
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अमृतसर-हावड़ा मेल – 1 घंटा लेट
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि कोहरे की वजह से दृश्यता बेहद कम हो गई है, जिससे ट्रेन संचालन में सावधानी बरतनी जरूरी है। यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ट्रेनों की गति सीमित रखी जा रही है। साथ ही दावा किया गया है कि हालात सामान्य होने पर ट्रेनों को समय पर चलाने की पूरी कोशिश की जाएगी।
हालांकि, यात्रियों का सवाल है कि हर साल सर्दियों में कोहरा पड़ता है, फिर भी रेलवे की तैयारियां नाकाफी क्यों रहती हैं। बेहतर सूचना प्रणाली, अतिरिक्त वेटिंग रूम और ठंड से बचाव के इंतजाम न होने पर रेलवे की व्यवस्थाओं पर सवाल उठना लाज़मी है।












