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“रंगमंच एक कालकोठरी है, जो इसमें आता है निकल नहीं पाता” – गिरिडीह में नाटक ‘कालकोठरी’ का सशक्त मंचन

गिरिडीह अधिवक्ता संघ भवन के हॉल में कला संगम के तत्वावधान में स्वदेश दीपक लिखित एवं सतीश कुन्दन निर्देशित नाटक कालकोठरी का प्रभावशाली मंचन किया गया। नाटक का डिज़ाइन नीतीश आनंद ने किया। यह नाटक रंगमंच से जुड़े कलाकारों के जीवन संघर्ष, पारिवारिक दबाव, आर्थिक तंगी और व्यवस्था की उपेक्षा को मार्मिक ढंग से प्रस्तुत करता है। रजत की भूमिका में नीतीश आनंद, मीनाक्षी के किरदार में सुजात कुमारी और दोहरी भूमिकाओं में रविश आनंद ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।

वहीं संस्कृति विभाग के असंवेदनशील रवैये को भी नाटक में तीखे व्यंग्य के साथ दिखाया गया।नाटक के कई दृश्य दर्शकों की आंखें नम कर गए, खासकर भूखे बच्चे और बेरोजगारी से जूझते कलाकारों की पीड़ा। संगीत व प्रकाश संयोजन विकास रंजन का रहा। उद्घाटन कला संगम के पदाधिकारियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। दर्शकों की भारी उपस्थिति और तालियों की गड़गड़ाहट ने मंचन को यादगार बना दिया।

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