झारखंड की सियासत को गर्माते हुए पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को एक विस्तृत पत्र भेजकर पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता और कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा गिरोह के बीच कथित गठजोड़ की व्यापक जांच की मांग की है। मरांडी ने आरोप लगाया है कि यह मामला केवल राज्य स्तर का नहीं, बल्कि ऐसा संगीन मुद्दा है जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा के पहलू जुड़े हैं। उनके अनुसार, सुजीत सिन्हा वर्षों से हत्या, उगाही और अवैध हथियारों के कारोबारी नेटवर्क के जरिये पूरे राज्य में आतंक फैलाता रहा है, और इस गिरोह को कोयलांचल शांति समिति (KSS) नाम के एक मुखौटा संगठन के रूप में संरक्षित किया गया।
पत्र में मरांडी ने दावा किया है कि गिरोह के संचालन में सिर्फ अपराधियों की भूमिका नहीं रही, बल्कि उच्च स्तर पर संरक्षण मिलने के स्पष्ट संकेत मौजूद हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि KSS के गठन और उसके संचालन में पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता की सीधी भूमिका रही, जिसके जरिए उगाही को संस्थागत स्वरूप दिया गया। मरांडी के मुताबिक, गिरोह द्वारा वसूली गई करोड़ों की राशि का एक हिस्सा पुलिस व्यवस्था के शीर्ष स्तर तक पहुंचता रहा, जिससे यह पूरे राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। उन्होंने कहा कि यह नेटवर्क न सिर्फ राज्य में अपराध बढ़ा रहा था बल्कि सरकारी परियोजनाओं पर भी अपराधी नियंत्रण स्थापित कर रहा था।
सबसे गंभीर आरोप उन विदेशी हथियारों को लेकर लगाए गए हैं, जिनके बारे में मरांडी का दावा है कि सुजीत सिन्हा गिरोह इन्हें पंजाब के मोगा जिले में ड्रोन से गिराए गए पैकेटों के माध्यम से खरीदता था। कहा गया है कि ये हथियार सीधे पाकिस्तान से भेजे जाते थे, जिससे यह खुलासा हुआ कि गिरोह किसी अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क से जुड़ा था। इसके अतिरिक्त, प्रिंस खान नामक अपराधी से गिरोह के संबंधों का भी उल्लेख किया गया है, जो पहले से ही राष्ट्रविरोधी गतिविधियों और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक संगठनों से जुड़ा बताया जाता है। यह पूरा मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े बड़े खतरे की ओर संकेत करता है।
मरांडी ने अमन साहू मुठभेड़ को भी पत्र में संदिग्ध बताते हुए कहा कि यह घटना संभवतः सुजीत सिन्हा गिरोह के लिए प्रतिस्पर्धा खत्म करने की रणनीति का हिस्सा थी। हाल ही में रांची पुलिस द्वारा सुजीत सिन्हा की पत्नी रिया सिन्हा की गिरफ्तारी और उसके मोबाइल डेटा के आधार पर सामने आए तथ्यों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पूर्व डीजीपी के साथ उसके संपर्क के कई ‘संदिग्ध संकेत’ मिले हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ पुलिस अधिकारियों ने रिया और पूर्व डीजीपी के चैट रिकॉर्ड को दबाने की कोशिश की, जो न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालने और प्रभावशाली लोगों को बचाने की साजिश को दर्शाता है। उन्होंने NIA से मांग की कि इस पूरे प्रकरण की गहन, निष्पक्ष और राष्ट्रीय स्तर की जांच की जाए।












