मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की अध्यक्षता में आयोजित राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में झारखण्ड के समग्र विकास, प्रशासनिक सुधार और जनकल्याण से संबंधित अनेक अहम प्रस्तावों पर मुहर लगी। बैठक में गारंटी मोचन निधि (Guarantee Redemption Fund) के संचालन के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक से प्राप्त अधिसूचना के प्रारूप को मंजूरी दी गई। साथ ही राष्ट्रीय आवास बैंक (NHB) के माध्यम से Urban Infrastructure Development Fund (UIDF) अन्तर्गत विभिन्न नगर विकास परियोजनाओं के कार्यान्वयन हेतु संशोधित प्राधिकार पत्र को स्वीकृति मिली। शिक्षा के क्षेत्र में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए सभी 24 जिलों के मुख्यमंत्री उत्कृष्ठ विद्यालयों (CM SoE) में STEM Lab स्थापित करने का निर्णय लिया है, जिससे विद्यार्थियों को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी। वहीं, नेतरहाट आवासीय विद्यालय के शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना के दायरे में लाने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दी गई है, जो शिक्षकों के हित में एक ऐतिहासिक फैसला माना जा रहा है।
बैठक में राज्य के पर्यटन, अधोसंरचना और पर्यावरण से संबंधित कई परियोजनाओं पर भी व्यापक चर्चा हुई। देवघर में ₹113.97 करोड़ की लागत से होटल वैद्यनाथ विहार के निर्माण और संचालन के लिए PPP मोड पर स्वीकृति प्रदान की गई। इससे धार्मिक पर्यटन को नई दिशा मिलने के साथ-साथ स्थानीय रोजगार सृजन की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। वहीं, गिरिडीह-जमुआ रोड (SH-13) और सिमडेगा रेंगारी-केरसई सड़क परियोजनाओं को प्रशासनिक स्वीकृति दी गई, जिससे राज्य के सड़क नेटवर्क को मजबूती मिलेगी और परिवहन व्यवस्था में सुधार आएगा। इसके अलावा, बैठक में देशी मांगुर (Clarias magur) को झारखण्ड की “राजकीय मछली” घोषित करने का निर्णय भी लिया गया, जो राज्य की जैव विविधता और मत्स्य पालन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस बैठक में झारखण्ड विधानसभा के शीतकालीन सत्र की तिथि निर्धारण, झारखण्ड पुलिस रेडियो एवं इंडिया रिजर्व बटालियन से संबंधित नियुक्ति नियमों में संशोधन, तथा विभिन्न विभागीय योजनाओं की समीक्षा जैसे विषयों पर भी विचार किया गया। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि ये सभी निर्णय राज्य के आर्थिक विकास, प्रशासनिक पारदर्शिता और जनहितकारी नीतियों को सशक्त बनाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार जनता की आकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए विकास के प्रत्येक क्षेत्र में ठोस कदम उठा रही है। इस बैठक को झारखण्ड की विकास यात्रा में एक नई दिशा देने वाला ऐतिहासिक निर्णय माना जा रहा है।












