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बिहार चुनाव 2025: मोदी की पार्टी के लिए अहम परीक्षा, पहले चरण में 42% वोटर टर्नआउट दर्ज

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का पहले चरण का मतदान गुरुवार को राज्य के 18 जिलों में संपन्न हुआ। सुबह से ही मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें देखी गईं, जिसमें मतदाता अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग करने के लिए उत्साह से पहुंचे। दोपहर 1 बजे तक निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार पहले चरण का कुल वोटर टर्नआउट 42 प्रतिशत रहा। विशेष रूप से गोपालगंज, बेगूसराय और पटना में मतदान में काफी अंतर देखा गया, जबकि पटना में सबसे कम 37 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ। कई बूथों पर वृद्ध और दिव्यांग मतदाताओं की सुविधा के लिए जिला प्रशासन ने इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर की व्यवस्था की और कुछ स्थानों पर मतदाताओं के आराम के लिए तम्बू और बैलून लगाए गए।

राजनीतिक दृष्टि से यह चुनाव बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बिहार में कुल 243 विधानसभा सीटों के लिए मतदान हो रहा है, जो दो चरणों में संपन्न होगा। पहले चरण में 3.75 करोड़ मतदाता मतदान कर रहे हैं। वर्तमान में राज्य में भाजपा और जद (यू) की गठबंधन सरकार है। विपक्षी महागठबंधन में रालो और कांग्रेस के अलावा अन्य छोटी पार्टियां शामिल हैं। इस चुनाव में प्रशांत किशोर की नई पार्टी, जन-सुराज पार्टी भी पहली बार चुनावी मैदान में उतरी है। इसके चलते यह चुनाव तीन तरफ़ा टक्कर का रूप ले रहा है।

चुनाव की पृष्ठभूमि भी विवादित रही है। कुछ महीनों पहले चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में संशोधन किया, जिसमें 74.2 मिलियन मतदाताओं की सूची जारी की गई और 4.7 मिलियन नाम हटा दिए गए। विपक्ष ने इसे मोदी की पार्टी को लाभ पहुंचाने के लिए मुस्लिम और अन्य समूहों के मतदाताओं को सूची से बाहर करने का आरोप लगाया। हालांकि भाजपा और चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज किया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव में महिला मतदाताओं की भागीदारी निर्णायक साबित हो सकती है। राज्य में लगभग आधे मतदाता महिलाएं हैं, और उनका मतदान पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ा है।

इस बार चुनाव में बिहार के अनुभवी नेता भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। जद (यू) के नीतीश कुमार और आरजेडी के लालू प्रसाद यादव का राजनीतिक प्रभाव अभी भी बरकरार है। लालू यादव के बेटे तेजस्वी यादव को विपक्षी गठबंधन का मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित किया गया है। राजनीतिक विश्लेषक संतोष सिंह के अनुसार, बिहार में उच्च मतदान प्रतिशत वाले क्षेत्रों में अधिकांशतः महिलाएं मतदान केंद्रों पर दिखती हैं। इसी कारण दोनों गठबंधनों ने महिलाओं को लुभाने के लिए विभिन्न कल्याण योजनाओं और वित्तीय सहायता की घोषणाएं की हैं।

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