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बिहार के फुटानीबाज़ः अनंत सिंह और सूरजभान की बाहुबली विरासत फिर बनी सियासत की पहचान

बिहार की राजनीति में बाहुबलियों की कहानियां आज भी उतनी ही चर्चित हैं, जितनी कभी 90 के दशक में हुआ करती थीं। मोकामा विधानसभा सीट पर एक बार फिर वही पुराना रोमांच लौट आया है — एक तरफ छोटे सरकार कहे जाने वाले अनंत सिंह, और दूसरी तरफ दबंग सूरजभान की पत्नी चुनावी मैदान में हैं। यह सिर्फ दो उम्मीदवारों की लड़ाई नहीं, बल्कि दो बाहुबली घरानों की सियासी विरासत का सीधा टकराव है। कभी गोलियों और बंदूकों की गूंज से पहचान बनाने वाले ये नाम अब वोटों की राजनीति में एक-दूसरे के खिलाफ खड़े हैं। मोकामा की गलियों में आज भी लोग बताते हैं कि जब ये दोनों अपने चरम पर थे, तब उनका नाम भर से इलाक़े में सन्नाटा छा जाता था। अनंत सिंह की छवि ‘छोटे सरकार’ के रूप में ऐसी बनी कि समर्थकों के बीच उनका नाम इज़्ज़त और डर दोनों का प्रतीक बन गया। वहीं सूरजभान की दबंगई ऐसी कि यूपी-बिहार की जुर्म की दुनिया तक उनके हुक्म से कांपती थी।

अब समय बदल गया है, पर दोनों बाहुबली परिवारों की सियासी विरासत आज भी कायम है। सूरजभान के चुनाव लड़ने पर पाबंदी है, तो उन्होंने अपनी पत्नी को मैदान में उतारा है, जबकि अनंत सिंह पहले ही अपनी पत्नी को राजनीति का चेहरा बना चुके हैं। जनता के बीच इस बार मुकाबला भले दो महिलाओं का है, लेकिन परछाई में असली भिड़ंत दो फुटानीबाज़ों की है। राजनीतिक रैलियों में अब बंदूक की जगह भाषणों की गोलाबारी है, मगर जोश वही है, तेवर वही हैं। मोकामा एक बार फिर बिहार की सबसे ‘हॉट’ सीट बन चुकी है, जहां हर गली-मोहल्ला इस टकराव की चर्चा से गूंज रहा है। सियासत ने भले रूप बदला हो, पर बाहुबली विरासत आज भी बिहार की राजनीति की पहचान बनी हुई है।

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