त्योहारों और मांगलिक कार्यक्रमों के इस मौसम में जहां लोग ऑनलाइन माध्यम से शादी के निमंत्रण पत्र भेज रहे हैं, वहीं साइबर अपराधियों ने भी इसका नया जाल बिछा दिया है। अब साइबर ठग व्हाट्सऐप और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एपीके (Android Package Kit) फाइल के रूप में नकली शादी के कार्ड भेज रहे हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति इस फाइल या लिंक को खोलता है, उसके मोबाइल में वायरस सक्रिय हो जाता है। यह वायरस न केवल मोबाइल का एक्सेस हैकर्स तक पहुंचा देता है, बल्कि ओटीपी, बैंक डिटेल्स और कॉन्टैक्ट लिस्ट जैसी संवेदनशील जानकारी भी चुरा लेता है। इसके बाद ठग आसानी से पीड़ित के बैंक खाते से पैसे ट्रांसफर कर लेते हैं और उसके नाम से दूसरों को भी फर्जी संदेश भेजकर ठगी करते हैं।
राजस्थान के भीलवाड़ा में महिला मंडल की करीब 150 महिलाओं को ऐसे ही नकली डिजिटल निमंत्रण भेजे गए, लेकिन समय रहते बैंक की सुरक्षा प्रणाली ने साइबर ठगी को रोक दिया। साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, ये ठग अज्ञात नंबर से शादी के कार्ड के साथ लिंक भेजते हैं, जिसमें छिपी एपीके फाइल डाउनलोड होते ही मोबाइल की सुरक्षा को तोड़ देती है। एक बार डाउनलोड होने के बाद, हैकर्स को यूजर के पूरे फोन पर नियंत्रण मिल जाता है। वे कॉन्टैक्ट लिस्ट का इस्तेमाल कर अन्य लोगों को भी वही लिंक भेजते हैं ताकि धोखाधड़ी का दायरा बढ़ सके। इस तरह, एक व्यक्ति की गलती सैकड़ों मोबाइल और बैंक खातों को खतरे में डाल सकती है।
साइबर ठगी से बचाव के लिए विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अज्ञात लिंक या एपीके फाइल को डाउनलोड न करें। शादी का निमंत्रण या कोई भी फाइल केवल भरोसेमंद स्रोतों से ही खोलें। यदि किसी प्रकार की ठगी हो जाती है, तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 या पोर्टल https://cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं। साथ ही बैंक और नजदीकी साइबर थाने को भी सूचित करें ताकि नुकसान को रोका जा सके। रांची साइबर थाना ने भी नागरिकों से आग्रह किया है कि वे ऐसे संदिग्ध लिंक से दूर रहें और दूसरों को भी जागरूक करें, क्योंकि साइबर अपराधियों के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार “सतर्कता” ही है।












