सूर्य उपासना के महापर्व छठ पूजा के आगमन के साथ ही बाजारों में रौनक तो बढ़ी है, लेकिन महंगाई ने उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है। पूजा की सामग्रियों—नारियल, गुड़, फल, बांस के सूप और विशेष रूप से गोविंद भोग चावल—की कीमतों में इस वर्ष उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल रही है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार गोविंद भोग चावल के दामों में लगभग 60 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जहां पिछले साल यह 75 से 85 रुपये प्रति किलो बिक रहा था,

वहीं अब इसका भाव 130 से 150 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। खाद्य सामग्री विक्रेताओं के अनुसार, इस साल चावल की पैदावार कम होने और बाजार में मांग बढ़ने से दामों में तेजी आई है। इसी तरह नारियल, जो पिछले साल 26 रुपये प्रति पीस मिल रहा था, इस बार 38 रुपये तक पहुंच गया है। व्यापारियों का कहना है कि नारियल पानी की बढ़ती खपत और अधपके नारियल की कटाई भी कीमतों में उछाल का बड़ा कारण है।थोक बाजारों में केवल चावल और नारियल ही नहीं, बल्कि पूजा में प्रयोग होने वाली अन्य सामग्रियों के दामों में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है।

गुड़, डालिया, टोकरी, और बांस से बने सूप की कीमतें भी 30 से 50 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं। एक दुकानदार के अनुसार, “हम खुद ऑर्डर देकर माल खरीदते हैं, इसलिए जो चीज़ें महंगी मिलती हैं, वे ग्राहकों तक उसी अनुपात में बढ़ी कीमत पर पहुंचती हैं।” वहीं छठ व्रती शालिनी वैशखियार कहती हैं कि “महंगाई जरूर बढ़ी है, पर आस्था में कोई कमी नहीं आएगी। छठ केवल एक पर्व नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और श्रद्धा का प्रतीक है।” भक्तों का यही अटूट विश्वास इस बात को साबित करता है कि चाहे बाजार के भाव कितने भी बढ़ जाएं, छठ की शुद्धता और भक्ति का प्रकाश हमेशा पहले जैसा उज्ज्वल रहेगा।













