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दीयों की रौशनी और बच्चों की मुस्कान से जगमगाया जैन विद्यालय जूनियर — हर्षोल्लास से मनाई गई दीपावली और छठ महापर्व

गिरिडीह स्टेशन रोड स्थित जैन विद्यालय जूनियर में आज का दिन खुशियों, रंगों और परंपराओं से सराबोर रहा। विद्यालय परिसर दीपावली और छठ जैसे दो महापर्वों के सम्मिलित उत्सव में डूबा रहा। हर कोने में दीयों की जगमगाहट, रंग-बिरंगी सजावट और बच्चों की खिलखिलाती मुस्कानें वातावरण को अद्भुत बना रही थीं। विद्यालय का हर हिस्सा मानो एक जीवंत चित्र बन गया था, जहाँ परंपरा और आधुनिकता का संगम दिखाई दे रहा था। छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह और अनुशासन के साथ पर्व की गरिमा को बनाए रखते हुए अपने रचनात्मक हुनर का प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम की शुरुआत भगवान राम, सीता और लक्ष्मण की सुंदर झांकियों से हुई, जिन्हें देखकर दर्शक भावविभोर हो उठे। छोटे-छोटे बच्चों ने इन झांकियों में अद्भुत अभिनय के माध्यम से मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन की झलक प्रस्तुत की। दीपावली के अवसर पर विद्यालय में पारंपरिक परिधान धारण किए विद्यार्थियों ने नृत्य, गीत और नाट्य प्रस्तुतियों से सभी का दिल जीत लिया। बच्चों के प्रदर्शन में जहाँ एक ओर उत्सव की उमंग झलक रही थी, वहीं भारतीय संस्कृति और मूल्यों की गहराई भी महसूस की जा रही थी। मंच से लेकर विद्यालय के गलियारों तक हर ओर “शुभ दीपावली” और “जय श्रीराम” के स्वर गूंज रहे थे।
कार्यक्रम का अगला चरण छठ महापर्व को समर्पित था। विद्यालय की छात्राओं ने गीतों और अभिनय के माध्यम से आस्था के इस महापर्व के महत्व को भावनात्मक रूप से प्रस्तुत किया। उन्होंने दिखाया कि कैसे सूर्य उपासना और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता की भावना से ओतप्रोत यह पर्व न सिर्फ धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक एकता का प्रतीक भी है। विद्यालय में विशेष रूप से छठ घाट का दृश्य तैयार किया गया था, जहाँ मिट्टी के सूर्यदेव, अर्घ्य का प्रतीक जल, फल-सामग्री और सजे हुए दौरे (बाँस की टोकरी) ने माहौल को वास्तविकता से भर दिया। बच्चों ने बड़ी श्रद्धा और समर्पण के साथ यह दर्शाया कि छठ पर्व केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति की आत्मा है
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय की प्राचार्या मल्लिका तिवारी ने बच्चों के उत्साह और उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों में न केवल रचनात्मकता को बढ़ाते हैं, बल्कि उन्हें अपनी जड़ों और संस्कृति से भी जोड़ते हैं। प्राचार्या ने सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को दीपावली और छठ की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं और कहा कि “दीयों की यह रौशनी हर दिल में ज्ञान और सद्भावना का प्रकाश फैलाए।” पूरे विद्यालय परिवार ने इस मौके पर एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर और शुभकामनाएँ देकर त्यौहार की भावना को और भी प्रगाढ़ किया।

इस प्रकार, जैन विद्यालय का यह उत्सव केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि यह एक जीवंत उदाहरण बन गया कि कैसे शिक्षा के साथ संस्कार, परंपरा और एकता का संगम विद्यार्थियों के व्यक्तित्व को और भी समृद्ध बना सकता है। विद्यालय का वातावरण न केवल दीयों से, बल्कि बच्चों के उत्साह और मासूम मुस्कुराहटों से सचमुच “जगमग” उठा।

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