गिरिडीह। गिरिडीह जिले के जमुआ-पाचंबा मुख्य मार्ग पर शुक्रवार तड़के एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा हो गया। यह दुर्घटना सुबह करीब चार बजे चंदा मोड़ के पास हुई, जब दो गाड़ियां आमने-सामने टकरा गईं। इस टक्कर की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के ग्रामीण नींद से जाग उठे। हादसे में एक ड्राइवर गंभीर रूप से घायल हुआ है, जबकि गाड़ियों के परखच्चे उड़ गए। यह हादसा इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोगों के बीच भय और सावधानी का माहौल व्याप्त है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, WB15E-2489 नंबर की एक सवारी गाड़ी, जो गिरिडीह से केला खाली कर जमुआ की ओर जा रही थी, और दूसरी ओर से आ रही JH11R-5731 नंबर की टेंपो, जो मुर्गी लोड करने के लिए जा रही थी, दोनों की भिड़ंत हो गई। तड़के का समय और कम दृश्यता के कारण दोनों ड्राइवरों का वाहन पर नियंत्रण बिगड़ गया। बताया जा रहा है कि दोनों ही गाड़ियां तेज रफ्तार में थीं, जिसके चलते टक्कर इतनी भीषण हुई कि वाहन सड़क किनारे बने गड्ढे में जा गिरे। घटना के बाद सड़क पर अफरातफरी मच गई और कुछ समय के लिए यातायात बाधित रहा।
हादसे के बाद का दृश्य बेहद भयावह था। टेम्पू का पीछे का डाला पूरी तरह अलग हो गया, जबकि सवारी गाड़ी के आगे का हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। गनीमत यह रही कि गाड़ियों में ज्यादा यात्री नहीं थे, नहीं तो हादसा और भी बड़ा हो सकता था। मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने तत्काल स्थानीय पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी। पुलिस के पहुंचने के बाद घायल ड्राइवर को तुरंत इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल भेजा गया, जहां उसकी स्थिति फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। पुलिस ने दोनों गाड़ियों को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। स्थानीय लोगों ने बताया कि इस मार्ग पर अक्सर तेज रफ्तार गाड़ियों के कारण हादसे होते रहते हैं, लेकिन इस हादसे ने एक बार फिर प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फिलहाल जमुआ थाना पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि तेज गति और कम दृश्यता इस दुर्घटना की मुख्य वजह थी। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या किसी वाहन में तकनीकी खराबी थी या चालक ने शराब का सेवन किया था। हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने प्रशासन से इस मार्ग पर स्पीड ब्रेकर और चेतावनी बोर्ड लगाने की मांग की है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। इस घटना ने एक बार फिर यह याद दिला दिया है कि सड़क पर थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है।
👉 निष्कर्ष:
यह सड़क हादसा एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि आखिर कब तक सड़क सुरक्षा को लेकर उदासीनता बरती जाती रहेगी। प्रशासन को चाहिए कि जमुआ-पाचंबा मार्ग जैसे व्यस्त रास्तों पर सख्त निगरानी रखी जाए और चालक भी “सुरक्षा पहले” के सिद्धांत को अपनाएं। समय रहते सावधानी और जिम्मेदारी भरा व्यवहार ही ऐसे हादसों से बचा सकता है।












