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डुमरी में आदिवासी जन आक्रोश रैली: कुड़मी/महतो समाज को एसटी सूची में शामिल करने के विरोध में उमड़ा जनसैलाब

डुमरी (गिरिडीह):
झारखंड के डुमरी प्रखंड में गुरुवार को आदिवासी समाज ने जबरदस्त शक्ति प्रदर्शन करते हुए “जन आक्रोश रैली” का आयोजन किया। यह रैली कुड़मी/महतो समाज को अनुसूचित जनजाति (ST) सूची में शामिल करने की मांग के विरोध में आयोजित की गई थी।
रैली में हजारों की संख्या में आदिवासी महिलाएं, पुरुष, युवक और युवतियां पारंपरिक वेशभूषा, नगाड़े, डमरू और हरवे-हथियारों के साथ शामिल हुए। पूरे डुमरी बाजार क्षेत्र में “आदिवासी अस्मिता जिंदाबाद” और “हमारा अधिकार सुरक्षित रहना चाहिए” जैसे नारों से माहौल गूंज उठा।


🏹 परंपरागत जोश के साथ निकली रैली

रैली की शुरुआत केबी उच्च विद्यालय मैदान से हुई, जहां सुबह से ही विभिन्न गांवों और प्रखंडों से लोग पहुंचने लगे थे।
लोगों का जनसैलाब मैदान से निकलकर रेलवे फाटक इसरी तक पहुंचा और फिर वापस मैदान में लौट आया।
करीब डेढ़ से दो किलोमीटर लंबी यह रैली अनुशासन और उत्साह के साथ निकली। जगह-जगह पारंपरिक नृत्य और ढोल नगाड़ों की थाप पर लोग झूमते नजर आए।

इस दौरान प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। एसडीपीओ सुमित प्रसाद स्वयं मौके पर मौजूद रहे और सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभाली।
उनके साथ डुमरी व निमियाघाट थाना प्रभारी और बड़ी संख्या में पुलिस बल भी तैनात था ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति न बने।


✊ आदिवासी नेताओं ने दिया चेतावनी भरा संदेश

रैली के समापन के बाद मैदान में एक सभा का आयोजन किया गया, जिसमें केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष गुंजन तिर्की, महिला मोर्चा की अध्यक्ष निशा भगत, जिला अध्यक्ष गुना मुर्मू, रांची जिला अध्यक्ष अमर तिर्की समेत कई अन्य आदिवासी नेता मौजूद थे।

सभा को संबोधित करते हुए निशा भगत ने कहा —

“आदिवासी समाज अपनी अस्मिता की रक्षा के लिए हर लड़ाई लड़ने को तैयार है। कुड़मी/महतो समाज को एसटी सूची में शामिल करने की मांग को कभी भी पूरा नहीं होने दिया जाएगा।”

वहीं, गुंजन तिर्की ने कहा कि यह आंदोलन केवल विरोध नहीं बल्कि आदिवासी अस्मिता और संविधानिक अधिकारों की रक्षा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को विभाजित करने की कोई भी कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


🪶 “हमारे हक को छीनने की कोशिश, नहीं करेंगे बर्दाश्त”

सभा में वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज सदियों से जल, जंगल और जमीन से जुड़ा रहा है। ऐसे में किसी भी समाज को “कृत्रिम रूप से एसटी सूची में जोड़ना” आदिवासियों के अधिकारों पर हमला है।
नेताओं ने राज्य और केंद्र सरकार से इस संबंध में स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की।

सभा में यह भी निर्णय लिया गया कि आने वाले दिनों में अगर सरकार ने इस दिशा में कोई कदम उठाया तो राज्यव्यापी आंदोलन किया जाएगा।
रैली में शामिल युवाओं ने कहा कि यह सिर्फ शुरुआत है — अगर जरूरत पड़ी तो रांची से दिल्ली तक सड़क पर उतरेंगे।

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