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झारखंड क्रिकेट चयन में 1 करोड़ की ठगी — पिता-पुत्र के खिलाफ केस दर्ज, SIT जांच में जुटी

झारखंड में क्रिकेट के नाम पर एक ऐसा घोटाला उजागर हुआ है जिसने खेल की ईमानदारी पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। शिवपहाड़ निवासी बुलबुल कुमार ने अपने बेटे आशुतोष आनंद को झारखंड की अंडर-19 और रणजी टीम में जगह दिलाने की उम्मीद में बक्सीबांध निवासी किसलय पल्लव और उसके पिता विनय कुमार सिन्हा पर भरोसा किया। लेकिन यह भरोसा उनके लिए एक डरावने सपने में बदल गया। किसलय ने चार सालों में धीरे-धीरे 1 करोड़ रुपये वसूले — आधी रकम ऑनलाइन और बाकी नकद में। पिता को अपने बेटे के उज्ज्वल भविष्य का सपना दिखाया गया, लेकिन उस सपने के पीछे छिपी थी एक सोची-समझी ठगी की साजिश, जिसने परिवार को आर्थिक और मानसिक दोनों रूप से झकझोर कर रख दिया।

किसलय पल्लव ने खुद को क्रिकेट बोर्ड से जुड़ा बताकर झूठ की एक पूरी कहानी रच डाली। उसने बीसीसीआई के संयुक्त सचिव देवोजीत साहा के नाम से एक फर्जी चयन पत्र तैयार किया, जिसमें आशुतोष आनंद का नाम झारखंड टीम में दर्ज दिखाया गया था। इतना ही नहीं, किसलय ने राज्य चयनकर्ताओं के साथ अपनी पुरानी तस्वीरें दिखाकर खुद को विश्वसनीय साबित किया। फर्जी दस्तावेज़, नकली हस्ताक्षर और मनगढ़ंत मीडिया एडवाइजरी — सबकुछ इतना असली लग रहा था कि कोई भी आसानी से धोखा खा जाए। जब बुलबुल कुमार को शक हुआ और उन्होंने पत्र की जांच कराई, तब जाकर असली सच सामने आया — सबकुछ जाली था, और उनका बेटा टीम में कभी चयनित हुआ ही नहीं।

पुलिस जांच में अब इस ठगी का जाल और गहराता जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, किसलय सिर्फ एक व्यक्ति नहीं बल्कि एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है, जो प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के परिवारों को निशाना बनाता है। वह व्हाट्सएप कॉल्स, नकली नंबरों और फर्जी पहचान के सहारे खुद को चयन समिति का सदस्य या बोर्ड अधिकारी बताता था। बुलबुल कुमार ने अपने बयान में कहा कि किसलय बार-बार फर्जी चयन मीटिंग और कैंप का हवाला देकर पैसों की मांग करता था। अब पुलिस कॉल रिकॉर्ड्स, ऑनलाइन ट्रांजैक्शन और डिजिटल साक्ष्यों की बारीकी से जांच कर रही है, ताकि इस पूरे रैकेट के तार कहां तक फैले हैं, इसका खुलासा किया जा सके।

नगर थाना प्रभारी जगन्नाथ धान ने पुष्टि की है कि किसलय पल्लव और उसके पिता विनय कुमार सिन्हा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है, जो साइबर और वित्तीय पहलुओं की जांच कर रही है। जांच अधिकारियों को शक है कि किसलय ने अन्य अभिभावकों को भी क्रिकेट चयन का लालच देकर ठगा है। फिलहाल पुलिस आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है। क्या यह सिर्फ एक पिता-पुत्र की ठगी है या इसके पीछे और भी बड़े नाम छिपे हैं? — इस सवाल का जवाब अब SIT की जांच ही देगी।

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