बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की घोषणा के बाद से ही सियासी हलचल तेज़ हो गई है। दो चरणों में होने वाले इस चुनाव को लेकर सभी दलों ने अपनी रणनीतियां बनानी शुरू कर दी हैं। पहले चरण में 6 नवंबर को 121 सीटों पर और दूसरे चरण में 11 नवंबर को 122 सीटों पर मतदान होगा, जबकि मतगणना 14 नवंबर को की जाएगी। इस बीच, एनडीए गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर मतभेद साफ़ नज़र आने लगे हैं। बीजेपी, जेडीयू, एलजेपी (रामविलास) और हम के बीच कई सीटों पर टकराव की स्थिति बनी हुई है। सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के आवास पर इस मुद्दे पर बीजेपी के शीर्ष नेताओं की एक अहम बैठक जारी है, जिसमें चुनावी रणनीति और उम्मीदवारों की सूची पर भी चर्चा की जा रही है।
वहीं, दूसरी ओर महागठबंधन खेमे में भी सीट बंटवारे को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कांग्रेस और वीआईपी पार्टी के बीच कई सीटों पर सहमति नहीं बन पा रही है, जबकि राजद प्रमुख तेजस्वी यादव ने साफ कहा है कि इस बार “योग्यता और जीतने की क्षमता” के आधार पर ही टिकट दिए जाएंगे। पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने महागठबंधन के भीतर समन्वय की अपील करते हुए कहा कि “कांग्रेस नेता राहुल गांधी अपनी पार्टी और कार्यकर्ताओं के सम्मान के लिए खड़े हैं, लेकिन गठबंधन धर्म सबसे ऊपर है।” उन्होंने कहा कि बिहार का यह चुनाव “विनाश बनाम विकास” का चुनाव होगा, और INDIA गठबंधन जनता के प्रेम, विकास और संघर्ष की ताकत पर यह लड़ाई जीतेगा।
चुनाव आयोग ने भी बिहार में पहले चरण की सभी 121 सीटों के लिए ईवीएम और वीवीपैट की आपूर्ति पूरी कर ली है। आयोग ने जिला प्रशासन को विधानसभा क्षेत्रवार ईवीएम आवंटन की सूची सौंप दी है, जिस पर जिलाधिकारियों और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के हस्ताक्षर किए गए हैं। सभी जिलों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है, और चुनावी सामग्री के रखरखाव के लिए विशेष निगरानी दल गठित किए गए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार का बिहार चुनाव कई नए समीकरणों और अप्रत्याशित गठबंधनों का गवाह बनेगा। सभी दल जनता को विकास, रोजगार और शिक्षा के वादों के ज़रिए रिझाने की कोशिश में हैं, लेकिन असली परीक्षा मतदाताओं की अदालत में ही होगी।












