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कोचिंग विधेयक में लचीलापन लाने की मांग पर मंत्री से मिले गिरिडीह-धनबाद के प्रतिनिधि

गिरिडीह/धनबाद, 26 सितम्बर: प्रस्तावित कोचिंग सेंटर विधेयक 2025 को लेकर गिरिडीह और धनबाद के कोचिंग संस्थान संचालकों में गहरी चिंता व्याप्त है। इसी कड़ी में शनिवार को एप्टा (Association of Private Teachers Academy) और डीसीए (Dhanbad Coaching Association) के प्रतिनिधि मंडल ने नगर विकास एवं उच्च शिक्षा-तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू से मुलाकात की। प्रतिनिधियों ने मंत्री को ज्ञापन सौंपकर मांग की कि इस विधेयक में आवश्यक संशोधन कर छोटे और मध्यम स्तर के कोचिंग संस्थानों को राहत दी जाए।

प्रतिनिधियों ने मंत्री को बताया कि इस समय झारखंड में लगभग 90% कोचिंग संस्थान छोटे स्तर पर संचालित हो रहे हैं, जिनमें 50 से 500 तक विद्यार्थी अध्ययनरत रहते हैं। इन संस्थानों के पास सीमित संसाधन और सीमित आय के साधन हैं। प्रस्तावित विधेयक की शर्तें इतनी कठोर हैं कि अधिकांश छोटे संस्थान अनुपालन करने में सक्षम नहीं होंगे। नतीजतन, हजारों शिक्षक और लाखों छात्र प्रभावित होंगे और छोटे कोचिंग सेंटर बंद होने की कगार पर पहुँच जाएंगे। वहीं दूसरी ओर, बड़े और ब्रांडेड कोचिंग संस्थानों पर इस विधेयक का कोई खास असर नहीं होगा।

बैठक में मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने प्रतिनिधियों की बात ध्यानपूर्वक सुनी और उन्हें सकारात्मक आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि ज्ञापन में लिखी गई बातों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। साथ ही मंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने के लिए हर संभव कदम उठा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ बड़े कोचिंग संस्थान शिक्षा से अधिक राजनीति और अन्य गतिविधियों में सक्रिय हैं, ऐसे संस्थानों पर कार्रवाई करना आवश्यक है।

गिरिडीह और धनबाद के कोचिंग संगठनों ने मंत्री से आग्रह किया कि विधेयक में ऐसे प्रावधान जोड़े जाएं, जिससे छोटे कोचिंग सेंटर भी आसानी से कार्य जारी रख सकें। प्रतिनिधियों ने कहा कि वे आगे भी एकजुट होकर अपनी आवाज उठाते रहेंगे और जरूरत पड़ने पर संघर्ष का रास्ता अपनाने से भी पीछे नहीं हटेंगे। इस मुलाकात से छात्रों और अभिभावकों के बीच उम्मीद जगी है कि सरकार कोचिंग विधेयक को अधिक व्यावहारिक और संतुलित रूप देने की दिशा में ठोस कदम उठाएगी।

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