गिरिडीह: ब्लड की जरूरत और इसके सही उपयोग को लेकर नेशनल एड्स कंट्रोल सोसाइटी झारखंड की ओर से होटल अशोका के सभागार में एक महत्वपूर्ण सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्घाटन नेको के सहायक निदेशक सुधीर कुमार, सिविल सर्जन डॉ. शेख मोहम्मद जफरुल्ला, ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. शोहेल अख्तर और आईएमए अध्यक्ष डॉ. रियाज अहमद ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। ट्रेनर डॉ. विभु विबोध ने ब्लड की आवश्यकता और उसकी उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि अनावश्यक ब्लड चढ़ाने से बचना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन मरीजों का हीमोग्लोबिन स्तर 10 ग्राम तक है, उन्हें सामान्य परिस्थितियों में ब्लड चढ़ाने की आवश्यकता नहीं होती और ऐसे मरीजों का सफलतापूर्वक ऑपरेशन भी किया जा सकता है।
उन्होंने चिकित्सकों को यह भी समझाया कि मरीजों के उपचार में पीआरबीसी ब्लड का उपयोग प्राथमिकता से किया जाना चाहिए, जबकि पूरे ब्लड का इस्तेमाल केवल बहुत आवश्यक परिस्थितियों में ही किया जाए। संक्रमण को रोकने के लिए उन्होंने कम से कम चार दिन पुराने डोनेट ब्लड के उपयोग की सलाह दी। इस अवसर पर डीएस डॉ. प्रदीप बैठा, डॉ. रेखा झा, डॉ. किरण कौशल, डॉ. आरआर बर्णवाल, डॉ. आरआर केड़िया, डॉ. मो. आज़ाद, डॉ. ज्ञान प्रकाश, डॉ. अरविंद, डॉ. उत्तम जालान, डॉ. मनीषा जालान, डॉ. विकास लाल, डॉ. राजीव कुमार, डॉ. श्यामल, डॉ. नीरज डोकानिया और डॉ. विकास केड़िया समेत कई वरिष्ठ चिकित्सक उपस्थित थे। इस सीएमई के जरिए चिकित्सकों को ब्लड प्रबंधन और संक्रमण नियंत्रण को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की गईं।












