नवरात्रि का चौथा दिन मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप मां कूष्मांडा की आराधना के लिए समर्पित होता है। धार्मिक मान्यता है कि मां कूष्मांडा की विधिपूर्वक पूजा करने से न केवल रोग, शोक और कष्टों का नाश होता है, बल्कि घर में धन, यश और आय की वृद्धि भी होती है। शास्त्रों में वर्णित है कि मां कूष्मांडा सूर्यमंडल के भीतर के लोक में वास करती हैं और उनके शरीर की आभा सूर्य के समान तेजस्वी है। इस दिन भक्त सूर्योदय से पूर्व स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं और मां कूष्मांडा का ध्यान करते हुए धूप, गंध, अक्षत, लाल पुष्प, श्रृंगार सामग्री और भोग अर्पित करते हैं। मां को उनका प्रिय भोग मालपुआ, दही और हलवा अर्पित करने की परंपरा है, जिसे मनवांछित फल की प्राप्ति का प्रतीक माना जाता है।
मां कूष्मांडा का स्वरूप अत्यंत दिव्य है। मां की आठ भुजाओं में क्रमशः कमंडल, धनुष, बाण, कमल पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र, गदा और जपमाला शोभा पाते हैं, और मां की सवारी सिंह है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, मां को लाल रंग के फूल जैसे लाल कमल, गुड़हल और गेंदा विशेष प्रिय हैं। भक्त जब मां को लाल पुष्प अर्पित करते हैं तो उन्हें दिव्य आशीर्वाद की प्राप्ति होती है। नवरात्रि के चौथे दिन का शुभ रंग हरा माना गया है, जो समृद्धि, शांति और ऊर्जा का प्रतीक है। भक्त हरे वस्त्र धारण कर मां की आराधना करते हैं ताकि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और प्रगति का संचार हो सके। मां कूष्मांडा की कृपा से साधक का जीवन आलोकित हो जाता है और उनके घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।












