झारखंड के प्रख्यात युवा लेखक और साहित्यकार अंशुमन भगत ने राज्य की शैक्षणिक और सांस्कृतिक धरोहर को नई दिशा देने की पहल की है। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से आग्रह किया है कि उन्हें ‘बिरसा मुंडा नेशनल लाइब्रेरी ऑफ नॉलेज’ की स्थापना का प्रस्ताव प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान किया जाए। अंशुमन भगत का मानना है कि यह पुस्तकालय केवल एक इमारत नहीं होगा, बल्कि यह झारखंड की आदिवासी सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षक और ज्ञान का एक अद्वितीय केंद्र बनेगा। उनके अनुसार, इस परियोजना से राज्य की पहचान एक नए स्तर पर पहुंचेगी और यह कदम झारखंड को शिक्षा और नवाचार के क्षेत्र में राष्ट्रीय मानचित्र पर स्थापित करेगा।
अंशुमन भगत ने स्पष्ट किया कि यह लाइब्रेरी महज पुस्तकों तक सीमित नहीं होगी, बल्कि इसमें डिजिटल नॉलेज हब, रिसर्च लैब्स, इनnovation सेंटर और सांस्कृतिक आदान-प्रदान मंच जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियां इस लाइब्रेरी को केवल ज्ञान का संग्रहालय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना और वैश्विक गौरव के प्रतीक के रूप में देखेंगी। इस परियोजना के माध्यम से झारखंड के छात्र, शोधार्थी और युवा वर्ग को अंतरराष्ट्रीय स्तर की शैक्षणिक और शोध सुविधाओं तक पहुंच प्राप्त होगी।
इस प्रस्ताव में न केवल शिक्षा और शोध की नई संभावनाएं जुड़ी हैं, बल्कि यह राज्य की संस्कृति और परंपरा को भी संजोने का प्रयास है। बिरसा मुंडा जैसे महान क्रांतिकारी के नाम पर स्थापित होने वाली यह लाइब्रेरी युवाओं में प्रेरणा का संचार करेगी और उन्हें अपनी जड़ों से जोड़ते हुए भविष्य की ओर अग्रसर करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की पहल झारखंड को “ज्ञान की भूमि” के रूप में पहचान दिला सकती है, जिससे शिक्षा, रोजगार और नवाचार के नए अवसर उत्पन्न होंगे।
अंशुमन भगत ने राज्य सरकार और नागरिकों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि यह परियोजना झारखंड के युवाओं के लिए भविष्य का द्वार साबित होगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस प्रस्ताव को प्राथमिकता देंगे और झारखंड को देश का पहला ‘नेशनल लाइब्रेरी ऑफ नॉलेज’ देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। यह कदम न केवल झारखंड, बल्कि पूरे देश के लिए गौरव का विषय होगा।












