गिरिडीह: शहर के बरगंडा स्थित आर.के. महिला कॉलेज के प्रांगण में सोमवार का दिन इतिहास रचने वाला साबित हुआ। यहां प्रोफेसर प्रशांत चंद्र महलानोबिस और उनकी धर्मपत्नी रानी महलानोबिस की स्मृति में स्थापित प्रतिमाओं का भव्य अनावरण किया गया। इस मौके पर कॉलेज की छात्राओं, शिक्षक-शिक्षिकाओं और स्थानीय लोगों की बड़ी संख्या में उपस्थिति ने इस क्षण को और भी गरिमामयी बना दिया। पूरा वातावरण श्रद्धा, कृतज्ञता और गर्व की भावना से सराबोर था।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में झारखंड सरकार के मंत्री सुदीव्य सोनू और गिरिडीह के उपायुक्त रामनिवास यादव उपस्थित हुए। दोनों का स्वागत कॉलेज की प्राचार्या डॉ. मधु श्री सन्याल ने पुष्पगुच्छ भेंट कर किया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई, जिसने इस आयोजन को आधिकारिक रूप से आरंभ किया। अतिथियों ने अपने संबोधन में महलानोबिस दंपत्ति के योगदान को भारतीय शिक्षा और समाज के लिए अमूल्य बताया।
वक्ताओं ने विशेष रूप से रानी महलानोबिस की दूरदर्शिता और त्याग को याद किया। वर्ष 1979 में उन्होंने अपनी निजी जमीन दान कर आर.के. महिला कॉलेज की नींव रखी थी। उनकी इस पहल के कारण आज यह कॉलेज गिरिडीह समेत आसपास के जिलों की हजारों बेटियों को उच्च शिक्षा का अवसर प्रदान कर रहा है। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा की ज्योति जलाकर रानी महलानोबिस ने बेटियों को न केवल पढ़ाई का अधिकार दिया बल्कि आत्मनिर्भर और सशक्त बनने का मार्ग भी प्रशस्त किया।
इस अवसर पर कई छात्राओं ने अपने विचार साझा किए और कहा कि यदि रानी महलानोबिस का त्याग न होता तो शायद वे आज इस स्तर की शिक्षा प्राप्त न कर पातीं। छात्राओं ने महलानोबिस दंपत्ति की प्रतिमाओं पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और उनके सपनों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। समारोह में मौजूद स्थानीय नागरिकों ने भी इस पल को गर्व का क्षण बताते हुए कहा कि महलानोबिस दंपत्ति का सपना अब साकार रूप ले चुका है और उनकी प्रेरणा आने वाली पीढ़ियों के लिए शिक्षा का दीप जलाती रहेगी।












