मुंबई स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) के दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी. के. मिश्रा ने भावी प्रबंधकों और शोधार्थियों को संबोधित करते हुए विकसित भारत के निर्माण में उनकी भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “Reform, Perform and Transform” मंत्र के साथ आत्मविश्वास और साहस के मार्ग पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। दीक्षांत समारोह में एमबीए, एग्जीक्यूटिव एमबीए और पीएचडी छात्रों को डिग्रियां प्रदान की गईं। इस अवसर पर डॉ. मिश्रा ने विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत प्रयास का परिणाम नहीं है, बल्कि इसमें परिवार, शिक्षकों और साथियों का धैर्य, सहयोग और प्रेरणा भी शामिल है।
डॉ. मिश्रा ने अपने भाषण में वैश्विक चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कोविड-19 महामारी, व्यापार युद्ध, भू-राजनीतिक तनाव, जलवायु परिवर्तन और तकनीकी व्यवधानों की चर्चा की। उन्होंने कहा कि इन सबके बावजूद भारत ने न केवल स्थिरता बनाए रखी है, बल्कि एक वैश्विक नवाचार केंद्र के रूप में उभरा है। देश में 1.9 लाख से अधिक स्टार्टअप और 100 से ज्यादा यूनिकॉर्न कंपनियां सक्रिय हैं, जिससे भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। उन्होंने सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए ₹1 लाख करोड़ के अनुसंधान राष्ट्रीय कोष (Anusandhan National Research Fund), IndiaAI मिशन और डीप टेक फंड जैसे पहलुओं पर प्रकाश डाला।
प्रधान सचिव ने मानव संसाधन विकास पर विशेष बल दिया और कहा कि केवल तकनीकी दक्षता ही पर्याप्त नहीं है। असली सफलता के लिए टीमवर्क, पारदर्शिता, नैतिकता, विनम्रता और आपसी सम्मान की भावना जरूरी है। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे सतत सीखने की प्रवृत्ति बनाए रखें, क्योंकि तेजी से बदलते युग में ज्ञान शीघ्र अप्रासंगिक हो जाता है। उन्होंने कहा, “व्यक्तिगत प्रतिभा से कहीं अधिक महत्वपूर्ण टीम वर्क है, और यही किसी भी संस्था की सफलता की असली कुंजी है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि Mission Karmayogi प्रशासनिक सुधारों में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाला एक बड़ा कदम है। इसके तहत iGOT प्लेटफॉर्म पर अब तक 1.3 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता, 3,300 से ज्यादा कोर्स और 5 करोड़ से अधिक कोर्स पूर्णता दर्ज की जा चुकी है।
अपने संबोधन के अंत में डॉ. मिश्रा ने 2014 से अब तक हुए प्रशासनिक सुधारों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि कैसे वरिष्ठ नौकरशाहों की नियुक्ति प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और योग्यता-आधारित बनाया गया है। Multi-Source Feedback (MSF) प्रणाली ने मूल्यांकन को अधिक विश्वसनीय और व्यापक बनाया है। वहीं, ग्रुप बी और सी पदों के लिए इंटरव्यू समाप्त करने से भर्ती प्रक्रिया में पक्षपात और व्यक्तिपरकता घटाई गई है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आज भारत केवल परिवर्तन की बात नहीं कर रहा, बल्कि “स्पीड, स्केल और पर्पस” के साथ उसे साबित कर रहा है। उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे कर्मयोगी की भावना को अपने जीवन और नेतृत्व यात्रा का हिस्सा बनाएं और विकसित भारत @2047 के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।












