डुमरी में 20 सितंबर को प्रस्तावित रेल टेका-डहर छेका आंदोलन के तहत होने वाले रेल रोको अनिश्चितकालीन धरना को लेकर शुक्रवार अपराह्न 4 बजे अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) डुमरी की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी डुमरी सह अंचल अधिकारी डुमरी और अंचल अधिकारी पीरटांड़ भी मौजूद रहे। बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी आंदोलन के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गहन समीक्षा करना और आवश्यक रणनीति तैयार करना था। प्रशासन ने साफ किया कि इस आंदोलन से आम जनजीवन प्रभावित न हो, इसके लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे।
बैठक में अधिकारियों ने आंदोलन के संभावित प्रभावों को ध्यान में रखते हुए दंडाधिकारियों को विशेष दिशा-निर्देश दिए। उन्हें स्पष्ट आदेश दिया गया कि आंदोलन के दौरान किसी भी परिस्थिति में शांति-व्यवस्था भंग न होने पाए। साथ ही, रेलवे संपत्ति और सार्वजनिक परिसंपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया। प्रशासन ने यह भी तय किया कि अगर किसी ने माहौल बिगाड़ने या नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया तो उसके खिलाफ विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए पुलिस बल की तैनाती और संवेदनशील इलाकों पर निगरानी रखने की योजना बनाई गई है।
गौरतलब है कि यह आंदोलन कुडमी समाज द्वारा अपनी जातीय पहचान को लेकर चलाए जा रहे संघर्ष का हिस्सा है। कुडमी समाज लंबे समय से आदिवासी जनजाति में शामिल किए जाने की मांग करता आ रहा है। इसी मुद्दे पर अपनी आवाज बुलंद करने के लिए समाज ने 19 सितंबर को देशभर में रेल रोको आंदोलन की घोषणा की है। इस ऐलान के बाद झारखंड के कई जिलों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया है। डुमरी समेत गिरिडीह जिले के अन्य हिस्सों में रेलवे ट्रैक और प्रमुख मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने की तैयारी चल रही है।
प्रशासन की कोशिश है कि आंदोलनकारियों के लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान करते हुए कानून-व्यवस्था भी कायम रखी जाए। अधिकारी चाहते हैं कि आंदोलन शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो, जिससे यात्रियों और आम लोगों को ज्यादा परेशानी न उठानी पड़े। बैठक में यह भी तय किया गया कि आंदोलन के दौरान लगातार हालात की निगरानी की जाएगी और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए त्वरित बल तैयार रखा जाएगा। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि 19 और 20 सितंबर को कुडमी समाज का यह आंदोलन कितना व्यापक असर डालता है और प्रशासन की तैयारियां कितनी कारगर साबित होती हैं।












