पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने चीन की 10 दिवसीय यात्रा के दौरान वहां के गुप्त और अत्याधुनिक सैन्य परिसर का दौरा किया। खास बात यह रही कि इस परिसर को देखने वाले वे पहले विदेशी राष्ट्राध्यक्ष बने। पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार, राष्ट्रपति और साथ ही पाकिस्तानी सेना के संवैधानिक प्रमुख होने के नाते जरदारी को चीन की नवीनतम रक्षा तकनीक, आधुनिक लड़ाकू विमान और मानवरहित हवाई वाहनों की जानकारी दी गई। एविएशन इंडस्ट्री कॉरपोरेशन ऑफ चाइना (AVIC) में उन्हें J-10, JF-17 थंडर और J-20 लड़ाकू विमानों की प्रगति दिखाई गई। साथ ही, चीन ने उन्हें स्वचालित सैन्य इकाइयों और आधुनिक कमांड-एंड-कंट्रोल सिस्टम की क्षमताओं से भी अवगत कराया।
जरदारी के इस दौरे को भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण हालातों के बीच बेहद अहम माना जा रहा है। पाकिस्तान की मीडिया में यह भी चर्चा है कि यह यात्रा भारत के “ऑपरेशन सिंदूर” के बाद पाकिस्तान और चीन के बीच सैन्य सहयोग को और मजबूत करने की कोशिश है। गौरतलब है कि पाकिस्तान को हाल के समय में भारत से मिली कड़ी सैन्य चुनौती ने उसके रक्षा ढांचे को हिला दिया है। ऐसे में जरदारी का यह दौरा और इससे पहले पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की बीजिंग यात्रा, चीन-पाकिस्तान की साझेदारी को और आक्रामक रूप से पेश कर रही है। वहीं, चीन ने इस दौरे को उतना प्रचारित नहीं किया और इसके बजाय अपने “ग्लोबल सिक्योरिटी इनिशिएटिव” को प्राथमिकता दी, जिसे अमेरिका के प्रभाव का विकल्प माना जा रहा है।
दरअसल, 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने 7 मई को “ऑपरेशन सिंदूर” लॉन्च किया था। इसमें भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए। 7 से 10 मई के बीच पाकिस्तान ने भारत पर ड्रोन और मिसाइल से हमला किया, लेकिन भारतीय सेना ने इसका जोरदार जवाब देते हुए पाकिस्तान के कई एयरबेस तबाह कर दिए। पाकिस्तान को भारी नुकसान उठाना पड़ा, जिससे उसकी सैन्य स्थिति कमजोर हो गई। अब पाकिस्तान चीन के साथ मिलकर इस कमजोरी की भरपाई करने की कोशिश करता नजर आ रहा है, जो भारत के लिए नए खतरे की घंटी हो सकती है।












