नेपाल की राजनीति में हालात लगातार बदलते जा रहे हैं। शनिवार (13 सितंबर, 2025) को राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के अध्यक्ष रवि लामिछाने नक्खु जेल में आत्मसमर्पण करने पहुंचे थे। हाल ही में हुए सरकार विरोधी जेन-जी आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने उन्हें जेल से बाहर निकाल दिया था। लेकिन अंतरिम प्रधानमंत्री के तौर पर पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की के पदभार ग्रहण करने के बाद, लामिछाने ने खुद को जेल अधिकारियों के हवाले करना चाहा। हालांकि, जेल प्रशासन ने अपर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए उन्हें जेल में रखने से इनकार कर दिया और वापस घर भेज दिया। इस दौरान उनकी पत्नी निकिता और पार्टी के कार्यवाहक अध्यक्ष डीपी आर्यल भी उनके साथ मौजूद थे।
लामिछाने ने जेल लौटने से पहले कहा कि वह इस उम्मीद के साथ आत्मसमर्पण कर रहे हैं कि अब उनके साथ किसी तरह का अन्याय नहीं होगा। उन्होंने इस दिन को खास बताते हुए कहा कि आज उनका जन्मदिन है और उन्हें जन्मदिन का तोहफा जेल भेजे जाने के रूप में मिल रहा है। लेकिन जेल प्रशासन ने उन्हें दो घंटे जेल परिसर में रखने के बाद बाहर भेज दिया। RSP नेता गणेश परजुली ने बताया कि जेल अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा की दृष्टि से लामिछाने अपने घर पर ज्यादा सुरक्षित रहेंगे और जब भी जरूरत होगी, उन्हें रिपोर्ट करने के लिए बुलाया जाएगा।
इस घटनाक्रम के बाद नेपाल की राजनीति में एक नया मोड़ आया है। रवि लामिछाने की पार्टी ने अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की का समर्थन करने का ऐलान किया है। लामिछाने ने कार्की से भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाने और देश की आर्थिक स्थिति सुधारने की अपील की है। वहीं, RSP महासचिव कविंद्र बुर्लाकोटी ने कहा कि सुशीला कार्की को मुश्किल संक्रमण काल में नेतृत्व की जिम्मेदारी मिली है। उन्होंने यह भी माना कि यह बदलाव देश की नई पीढ़ी, खासकर जेन-जी के निर्णायक हस्तक्षेप की वजह से संभव हो पाया है। नेपाल की सियासत में यह घटनाक्रम आगे आने वाले दिनों में कई और बड़े फैसलों का संकेत देता है।












