नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) ने अपने नए निदेशक के रूप में प्रोफेसर प्रदीप कुमार प्रजापति का स्वागत किया है। प्रो. प्रजापति आयुर्वेद जगत का एक प्रतिष्ठित नाम हैं, जिनकी पहचान न केवल देश में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी है। वे दशकों से आयुर्वेदिक चिकित्सा, शोध और शिक्षा को एक नई दिशा देने में अग्रणी भूमिका निभाते आए हैं। एआईआईए द्वारा उनका स्वागत केवल एक प्रशासनिक नियुक्ति नहीं है, बल्कि यह आयुर्वेद की प्राचीन धरोहर को आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ दुनिया तक पहुँचाने की एक ऐतिहासिक पहल मानी जा रही है।
प्रो. प्रजापति की शैक्षणिक यात्रा और शोध कार्यों ने उन्हें एक ऐसे व्यक्तित्व के रूप में स्थापित किया है, जिन्होंने आयुर्वेद को आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के समकक्ष खड़ा करने में अहम योगदान दिया है। उन्होंने अपनी लंबी सेवा अवधि में आयुर्वेदिक ग्रंथों के गहन अध्ययन से लेकर क्लीनिकल रिसर्च तक कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। उनके नेतृत्व में कई शोध परियोजनाएं और प्रकाशन सामने आए हैं, जो न केवल चिकित्सा विज्ञानियों के लिए मार्गदर्शक बने हैं, बल्कि छात्रों और शोधकर्ताओं को भी प्रेरित करते हैं। एआईआईए की जिम्मेदारी संभालते हुए वे संस्थान को एक वैश्विक केंद्र बनाने के मिशन पर कार्यरत रहेंगे, जिससे भारत की परंपरागत चिकित्सा प्रणाली और अधिक सशक्त होगी।
एआईआईए का मानना है कि प्रो. प्रजापति के नेतृत्व में संस्थान न केवल आयुर्वेद के क्षेत्र में शिक्षा और शोध को बढ़ावा देगा, बल्कि आयुर्वेदिक चिकित्सा की विश्वसनीयता और प्रभावशीलता को वैश्विक मंच पर स्थापित करेगा। वर्तमान समय में जब दुनिया प्राकृतिक और वैकल्पिक चिकित्सा की ओर अग्रसर है, तब प्रो. प्रजापति का अनुभव और दृष्टिकोण भारत की इस धरोहर को नई ऊँचाइयों तक ले जाने में मील का पत्थर साबित हो सकता है। उनकी कार्ययोजना में पारंपरिक चिकित्सा और आधुनिक टेक्नोलॉजी का समन्वय कर ऐसे समाधान ढूँढना शामिल है, जो न केवल रोगों का उपचार करें बल्कि जीवनशैली को भी संतुलित और स्वस्थ बनाएँ।
यह नियुक्ति भारत सरकार के उस विजन को भी मजबूती प्रदान करती है, जिसमें आयुर्वेद और अन्य भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को न केवल भारत में बल्कि विश्वभर में मान्यता और सम्मान दिलाने का लक्ष्य है। एआईआईए के नए निदेशक के रूप में प्रो. प्रजापति की जिम्मेदारी बड़ी है, लेकिन उनके अनुभव, दूरदृष्टि और समर्पण से उम्मीद है कि आयुर्वेद एक नई उड़ान भरेगा। आने वाले समय में यह पहल भारत को स्वास्थ्य और जीवनशैली के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व प्रदान कर सकती है। निस्संदेह, प्रो. प्रदीप कुमार प्रजापति का एआईआईए से जुड़ना आयुर्वेद प्रेमियों और चिकित्सा जगत के लिए उत्साह और गर्व का क्षण है।












