झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) ने एक बार फिर रोजगार का बड़ा “ट्रेलर” दिखा दिया है। महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता (ANM) के 3181 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन की आज अंतिम तिथि है। हां, वही आवेदन, जिसे भरते वक्त उम्मीदवारों को लगता है कि जैसे वे भविष्य नहीं, बल्कि कोई लॉटरी टिकट खरीद रहे हों। मैट्रिक पास, ANM ट्रेनिंग और झारखंड स्टेट नर्सिंग काउंसिल में रजिस्ट्रेशन – सबकुछ मांग लिया गया है, बस उम्मीदवारों की आत्मा का पंजीकरण बाकी रह गया है। आखिरकार, 100 रुपये (एससी/एसटी के लिए 50 रुपये) की “मोटी रकम” देकर ही कोई “भाग्यशाली विजेता” परीक्षा हॉल तक पहुंच सकता है।
अब बात आती है परीक्षा की। आयोग कह रहा है कि लिखित परीक्षा होगी, OMR आधारित भी हो सकती है, CBT भी। मतलब यह कि परीक्षा कैसे होगी – यह भी सरप्राइज पैकेज का हिस्सा है। और अगर परीक्षा अलग-अलग शिफ्ट में हुई तो नॉर्मलाइजेशन होगा। यानी उम्मीदवार जितनी मेहनत करे, नतीजा फिर भी कंप्यूटर का मूड देखकर ही आएगा। यह वही प्रक्रिया है जिसमें हर उम्मीदवार का सपना “सरकारी नौकरी” बनते-बनते “सरकारी मजाक” बन जाता है। लेकिन हां, आयोग का दावा है कि योग्य महिला उम्मीदवारों को ही प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा में मौका मिलेगा। अब योग्य कौन है और भाग्यशाली कौन – यह आयोग ही तय करेगा।
इधर सरकार ने जेलों में कक्षपाल भर्ती की तैयारी भी कर ली है। पुरुषों के लिए 1634 और महिलाओं के लिए 64 पद – वाह! जेल के कैदियों से ज्यादा तो पद खाली पड़े हैं। दौड़ की शर्त भी आसान कर दी गई है – पुरुषों को 6 मिनट में 1600 मीटर और महिलाओं को 10 मिनट में वही दूरी। पहले की 10 किलोमीटर और 6 किलोमीटर की दौड़ घटाकर “जॉगिंग” बना दिया गया है। शायद सरकार को भी पता चल गया है कि बेरोजगारी की मैराथन दौड़ते-दौड़ते उम्मीदवार पहले से ही थक चुके हैं। कुल मिलाकर, JSSC भर्तियां अब युवाओं के लिए रोजगार नहीं, बल्कि “धैर्य परीक्षा” का दूसरा नाम बन चुकी हैं।












